SC ने पूर्व CAG विनोद राय समेत तीन लोगों को सौंपी BCCI का एडमिनिस्ट्रेशन चलाने की जिम्मेदारी

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने BCCI का एडमिनिस्ट्रेशन चलाने की जिम्मेदारी पूर्व CAG विनोद राय, रामचंद्र गुहा और विक्रम लिमये को सौंपी है। कोर्ट को इन नामों का एलान 24 जनवरी की सुनवाई में करना थी। लेकिन उसने क्रिकेट बोर्ड और केंद्र को भी नाम सुझाने के लिए कहा था। कोर्ट ने उन्हें 27 जनवरी तक बंद लिफाफे में नाम देने को कहा था। कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि कोर्ट की ओर से अप्वॉइंट किए जा रहे एडमिनिस्ट्रेटर्स बीसीसीआई में अगले इलेक्शन होने तक ही काम करेंगे। बता दें कि लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं करने की वजह सुप्रीम कोर्ट ने 2 जनवरी को बीसीसीआई प्रेसिडेंट अनुराग ठाकुर और सेक्रेटरी अजय शिर्के को हटा दिया था।

एमिकस क्यूरी ने 70 साल से ज्यादा वालों के दिए थे नाम
– इससे पहले 24 जनवरी को मामले की सुनवाई हुई थी।
– इस केस में रेलवे, सर्विसेज और यूनिवर्सिटीज यूनियंस की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध कर रहे थे।
– इसमें अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देश की इमेज खराब हुई है। इस पर कोर्ट ने उनसे पूछा कि जुलाई में जब फैसला हुआ था तब आप कहां थे?
– दरअसल, एमिकस क्यूरी ने एडमिनिस्ट्रेटर्स के लिए जो 9 नाम सौंपे थे, उनमें कुछ 70 साल से ज्यादा उम्र वालों के थे। यह लोढ़ा पैनल की सिफारिशों के खिलाफ है।
– बीसीसीआई में एडमिनिस्ट्रेटर्स अप्वॉइंट करने का बोर्ड और केन्द्र सरकार ने भी विरोध किया है। उनका कहना था कि वे भी नाम सजेस्ट करना चाहता हैं।
– ये वे लोग होंगे जो अगले महीने होने वाली आईसीसी की मीटिंग में बीसीसीआई की ओर से शामिल होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी उठाया था सवाल
– 20 जनवरी को हुई सुनवाई में एमिकस क्यूरी ने एडमिनिस्ट्रेटर्स के लिए 9 नाम बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपे थे।
– हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सवाल किया था कि इसमें 70 साल से ज्यादा उम्र के कुछ लोगों के नाम क्यों दिए गए हैं।
– सुप्रीम कोर्ट ने एडमिनिस्ट्रेटर्स नॉमिनेट करने में मदद के लिए एडवोकेट अनिल दीवान और गोपाल सुब्रमण्यम को एमिकस क्यूरी बनाया था।

इसलिए हटाए गए थे अनुराग और शिर्के
– 2 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई प्रेसिडेंट और अजय शिर्के को सेक्रेटरी की पोस्ट से हटा दिया था।
– इन दोनों को बोर्ड में ट्रांसपेरेंसी और जवाबदेही तय करने में फेल रहने पर हटाया गया था।
– सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि ठाकुर और शिर्के ने कोर्ट के 18 जुलाई 2016 के ऑर्डर का पालन नहीं किया।
– सुप्रीम कोर्ट ने ठाकुर से उन आरोपों पर भी जवाब मांगा है, जो सुब्रमण्यम ने उन पर लगाए थे।

पिछले साल 18 जुलाई को SC ने मानी थीं लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें
– सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई 2016 को बीसीसीआई के ढांचे में सुधार को लेकर की गई जस्टिस लोढ़ा कमेटी की अहम सिफारिशों को मंजूर किया था।
– कोर्ट ने बोर्ड को सिफारिशों पर अमल के लिए 6 महीने की डेडलाइन भी दी थी।
– 1 अक्टूबर को बोर्ड ने कमेटी की कई सिफारिशें मान ली थी, लेकिन कुछ अहम सिफारिशों को मानने से इनकार कर दिया, जिस पर बोर्ड और कमेटी के बीच विवाद हुआ।

बोर्ड के 88 साल के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा
– सुप्रीम कोर्ट ने 2 जनवरी को अपने फैसले में कहा था, बीसीसीआई में लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू नहीं करने के लिए ठाकुर और शिर्के जिम्मेदार हैं।
– पूर्व चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अगुआई वाली बेंच ने ठाकुर से पूछा था कि आखिर उनके खिलाफ केस क्यों न चलाया जाए। इस पर ठाकुर ने कहा था कि अगर अदालत को लगता है कि बोर्ड रिटायर्ड जजों के नेतृत्व में अच्छा काम करेगा तो मैं उन्हें ऑल द बेस्ट कहना चाहता हूं।
– बोर्ड के 88 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने इसके प्रेसिडेंट और सेक्रेटरी को हटा दिया।

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