तेंदुए से सुरक्षित नहीं हैं लोग, वन विभाग के पास ट्रैंक्यूलाइजर गन्स का आकाल

शिमला

हिमाचल में लोग तेंदुए से सुरक्षित नहीं हैं और इसका सबसे बड़ा कारण वन विभाग के पास जरूरी सामान उपलब्ध ना होना है. वाइल्ड लाइफ विंग के पास ट्रैंक्यूलाइजर गन्स नहीं हैं. जबकि सरकार को यह प्रस्ताव भेजे हुए एक वर्ष से भी ज्यादा का समय हो चुका है, मगर इसकी मंजूरी अब तक नहीं मिल पाई है.

दरअसल, तेंदुओं को जिस इंजेक्शन से बेहोशी की दवा दी जाती है, वह एक खास किस्म की बंदूक होती है, जिसे विदेशों से आयात किया जाता है. हर वर्ष इसके स्पेयर पार्ट्स बदलने आवश्यक होते हैं. हिमाचल में पिछले दो वर्षों से इन बंदूकों का अकाल पड़ा है.

सूत्रों के मुताबिक यह प्रस्ताव अभी तक मंजूर नहीं हो सका है. तेंदुओं को काबू में करने के लिए इसी बंदूक द्वारा इंजेक्शन दागा जाता है. बेहोशी के बाद तेंदुओं व अन्य जंगली जानवरों को काबू में करके रेस्क्यू सेंटर भेजा जाता है.

हिमाचल में ऊना, सिरमौर, हमीरपुर समेत बिलासपुर, मंडी व शिमला में तेंदुओं के हमले बढ़ रहे हैं. यही नहीं, हिमाचल में 1990 के बाद लैपर्ड गणना ही नहीं हुई है. अब पूरे देश के विभिन्न राज्यों में लैपर्ड गणना का कार्य लगभग पूरा होने को है, मगर हिमाचल व उत्तराखंड इसमें शामिल नहीं है. जबकि दोनों ही प्रदेशों में इनकी संख्या बढ़ रही है.

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