डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रांस पैसेफिक समझौते से अमेरिका को हटाया, ओबामा के एक और फैसले को रद्द किया

वॉशिंगटन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपने वादे के अनुरूप अमेरिका को ट्रांस-पेसिफिक पार्टनरशिप (टीपीपी) व्यापार समझौते से औपचारिक रूप से हटा लिया. उन्होंने 12 देशों के व्यापार समझौते की वार्ता प्रक्रिया से वापसी के आदेश पर दस्तखत किए.

यह पहल उनके पूर्ववर्ती बराक ओबामा की बड़ी अंतरराष्ट्रीय व्यापार परियोजनाओं में से एक थी. इतना ही नहीं, सात साल की लंबी बातचीत के बाद पिछले साल 4 फरवरी को न्यूजीलैंड में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे. टीपीपी के कुल 12 सदस्य हैं.

ट्रंप का मानना है कि यह करार अमेरिकी नौकरियों और विनिर्माण क्षेत्र के हितों के खिलाफ था. इससे पहले नए राष्ट्रपति ट्रंप ने शपथ ग्रहण करने के कुछ ही घंटों बाद ओबामाकेयर के आर्थिक बोझ को कम करने के मकसद से कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे.

ट्रंप ने टीपीपी से अमेरिका के हटने के आदेश पर दस्तखत करने के बाद कहा, “हम लंबे समय से इस बारे में बात कर रहे थे. यह अमेरिकी श्रमिकों के लिए बहुत अच्छा वक्त है.” ट्रंप ने अपने प्रचार अभियान में इस बारे में वादा किया था. उन्होंने दलील दी थी कि यह अमेरिकी कर्मियों और निर्माण क्षेत्र के लिए नुकसानदेह सौदा है. शीर्ष रिपब्लिकन सीनेटर जॉन मैकेन ने ट्रंप के फैसले को त्रुटि करार दिया है.

इस व्यापार समझौते को पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की एशिया नीति की धुरी माना जाता था. राष्ट्रपति पद के लिए अपने चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने टीपीपी को एक “संभावित आपदा” करार देते हुए कहा था कि इससे अमरीका में उत्पादन क्षेत्र को नुक़सान हुआ है. डोनल्ड ट्रंप ने “बड़े पैमाने पर” टैक्स घटाने और विनियमनों को कम करने का वादा किया है. लेकिन जिन कंपनियों के कारखाने विदेशों में हैं उन पर “बहुत बड़ा सीमा कर” लगाने का एलान किया है.

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