नोटबंदी के बाद जन धन खातों में जमा पर नीति आयोग की टीम की नजर

दिल्ली

डीमॉनेटाइजेशन के बाद जन धन खातों में जाली ट्रांजैक्शंस पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नहीं, बल्कि नीति आयोग में मौजूद बिग डेटा एक्सपर्ट्स नजर रखेंगे. उसकी टीम उन बैंक खातों की जांच कर सकती है, जिनमें गड़बड़ी का शक होगा.

नीति आयोग ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, बैंगलोर के फैकल्टी मेंबर और डेटा ऐनालिटिक्स एक्सपर्ट पुलक घोष को इस काम की अगुवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया कि टीम डीमॉनेटाइजेशन के बाद जन धन खातों में हुए डिपॉजिट में गड़बड़ियों का पता लगाएगी.

घोष नीति आयोग के डेटा ऐनालिटिक सेल का हिस्सा होंगे. इसके प्रमुख नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) अवीक सरकार हैं.

अधिकारी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से 8 नवंबर को डीमॉनेटाइजेशन की घोषणा के बाद जन धन खातों में हुई जाली ट्रांजैक्शंस का पता लगाने के लिए नीति आयोग के डेटा ऐनालिटिक सेल ने सभी बैंकों की ट्रांजैक्शंस की जानकारी मांगी है.’

पिछले वर्ष 2-30 अक्टूबर के बीच 32 लाख जन धन खातों में 646 करोड़ रुपये जमा हुए थे. नवंबर में डीमॉनेटाइजेशन के बाद 30 नवंबर को जन धन खातों में डिपॉजिट 29,000 करोड़ रुपये बढ़कर 74,321 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो 2 नवंबर को 45,302 करोड़ रुपये था.

देश में बैंकिंग की दायरा बढ़ाने और फाइनैंशल इन्क्लूजन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री जन धन योजना अगस्त 2014 में लॉन्च की गई थी. इन खातों में डिपॉजिट की लिमिट 50,000 रुपये है. हालांकि, डीमॉनेटाइजेशन के बाद इन खातों को इस्तेमाल ब्लैक मनी रखने वाले लोगों के करने की आशंका के मद्देनजर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने इन खातों से निकासी सीमा 10,000 रुपये प्रतिमाह कर दी थी. इसके बाद दिसंबर के अंत में जन धन खातों में जमा रकम घटकर 71,036 करोड़ रुपये पर आ गई थी.

नीति आयोग के इस कदम के बारे में इन्फोसिस के पूर्व बोर्ड मेंबर टी वी मोहनदास पाई ने कहा, ‘बैंकिंग सिस्टम में फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए बिग डेटा और ऐनालिटिक्स काफी मददगार हो सकते हैं.’ आईआईएम बैंगलोर ने घोष की नीति आयोग में नियुक्ति की पुष्टि की है.

इंस्टीट्यूट के प्रवक्ता ने ईटी की ओर से भेजी गई ईमेल के जवाब में कहा, ‘यह सही है कि प्रफेसर पुलक घोष नीति आयोग के लिए काम कर कर रहे हैं. अभी वह काम के सिलसिले में ट्रैवल कर रहे हैं और इस वजह से वह टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हैं.’ आईआईएम बैंगलोर को जॉइन करने से पहले घोष अमेरिका की जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी और एमोरी यूनिवर्सिटी, अटलांटा में प्रोफेसर थे.

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