आखिरकार देश छोड़ने को मजबूर हुआ एड्स पीड़ित याह्या जामेह

अफ्रीका के छोटे से देश गांबिया में 22 साल से राष्ट्रपति रहे याह्या जामेह को आखिरकार पद छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। शनिवार को पांच देशों की सेनाओं के दबाव और दो देशों के राष्ट्रपतियों के समझाने पर वे पद और देश छोड़ने को तैयार हुए। जामेह ने 1994 में फौजी विद्रोह के साथ सत्ता संभाली थी। उनका दावा था कि वे एड्स और दमा का शर्तिया इलाज करते हैं।

चुनाव जीते हुए प्रेसिडेंट को दूसरे देश में लेनी पड़ी शपथ
लगातार चार बार राष्ट्रपति चुनाव जीत चुके जामेह पिछले साल एक दिसंबर को हुए चुनाव में रीयल एस्टेट कारोबारी अडामा बैरो से हार गए थे।
– हार मानने के बाद उन्होंने पद छोड़ने से मना कर दिया। देश में तीन महीने के लिए इमर्जेंसी लगाकर अपना कार्यकाल 90 दिन बढ़ा लिया था।
– सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात तो यह है कि जीते हुए उम्मीदवार बैरो को भाग कर पड़ोसी देश सेनेगल जाना पड़ा था।
– गुरुवार को जामेह का कार्यकाल खत्म होने के बाद बैरो ने गुरुवार को सेनेगल में गांबिया के दूतावास में राष्ट्रपति पद की शपथ ले ली।

अफ्रीकी देशों ने दी थी धमकी
– अफ्रीकी देशों के संगठन इकोवास ने जामेह को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने पद नहीं छोड़ा तो वह अपनी सेनाएं भेज कर जबरन उन्हें पद से हटा देंगे।
– जामेह ने पद नहीं छोड़ा तो नाईजीरिया और सेनेगल सहित पांच देशों की सेनाएं गांबिया पहुंच गईं।
– गांबिया के सेना अध्यक्ष ने पहले जामेह का समर्थन किया लेकिन बाद में तटस्थ रहने का फैसला किया।

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