जलीकट्टू पर अगले हफ्ते आ सकता है फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर सहमति जता दी है कि वह जल्लीकट्टू पर एक हफ्ते तक कोई फ़ैसला नहीं देगा. इस दौरान केंद्र तमिलनाडु से बातचीत कर कोई रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है.

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि जस्टिस दीपक मिश्रा और आर बानुमति की बेंच के पास इस मामले के आने से पहले केंद्र और राज्य सरकार मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु जल्लीकट्टू को लेकर काफ़ी उत्साहित है. रोहतगी ने इस बेंच से कहा, ”केंद्र और राज्य बातचीत कर विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में मेरा अनुरोध है कि कोर्ट कम से कम एक हफ़्ते तक इस पर कोई फ़ैसला न दे.” अटॉर्नी जनरल के अनुरोध पर इस बेंच ने सहमति जता दी है.

तमिलनाडु में 10 हज़ार लोग जल्लीकट्टू के समर्थन में विरोध कर रहे हैं. हालांकि यह विरोध शांतिपूर्ण है. कोर्ट को बताया गया है कि जल्लीकट्टू पर उसके फ़ैसले से क़ानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है. सांडों की लड़ाई से जुड़ा ये मामला कोर्ट में लंबित है.

तमिलनाडु सरकार का कहना है कि यह उसकी संस्कृति का हिस्सा है. दूसरी तरफ जानवरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस खेल में सांडों को प्रताड़ित किया जाता है. इस खेल का आयोजन पोंगल और फसलों की कटाई के दौरान होता है.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने शुक्रवार की सुबह कहा कि जल्लीकट्टू की तमिलनाडु में अध्यादेश के ज़रिए वापसी होगी. उन्होंने कहा कि यह एक कार्यपालिका से जुड़ा आदेश होगा और इसकी समीक्षा राष्ट्रपति प्रवण मुखर्जी करेंगे. उन्होंने मरीना तट पर इसके समर्थन में विरोध कर रहे लोगों को वापस लौटने की अपील की है.

हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक इस मामले में बैन को औपचारिक रूप से वापस लेने की घोषणा नहीं होती है तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा.

गुरुवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की थी. हालांकि प्रधानमंत्री ने पन्नीरसेल्वम से कहा कि वह इस मुद्दे पर कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे क्योंकि सुप्रीम कोर्ट से अभी अंतिम फ़ैसला आना बाकी है. दूसरी तरफ प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र इस सांस्कृतिक आयोजन में राज्य सरकार के साथ है.

तमिलनाडु सरकार के अध्यादेश पर राष्ट्रपति हस्ताक्षर कर देते हैं तो यह फिर से लागू हो जाएगा. तमिलनाडु सरकार इस अध्यादेश में जल्लीकट्टू को खेल बता सकती है.

2014 में सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन पिछले साल केंद्र के हस्तक्षेप से इसे फिर से लागू कर दिया गया था. इसे फिर से ऐनिमल राइट्स ऐक्टिविस्टों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. अब यह मामला कोर्ट में है और इस पर अगले हफ़्ते फ़ैसला आ सकता है.

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