जानिए, वीरता पुरस्कार जीतने वाले बच्चों की वीर गाथाएं

राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2016 पाने वाले बच्चे हाल ही में में थे। इस बार जिन 25 बच्चों को चुना गया है, उनमें 12 लड़कियां हैं, जबकि 13 लड़के। चार बच्चों को यह पुरस्कार मरणोपरांत दिया गया है।

नहर में कूद बच्चे को बचाया

सुल्तान फिल्म में रेफरी की भूमिका निभाने वाले शमशेर लोगों के जेहन में भले ही याद न हों, लेकिन उनके बेटे नमन ने ऐसा काम किया है, जो फख्र का सबब है। दिल्ली निवासी नमन को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। पीतमपुरा गांव निवासी शमशेर सिंह और पूनम के दो बच्चे हैं- नमन (16) और कुलश्रेष्ठ (10)। दोनों 2015 में गर्मियों की छुट्टियों में मामा के घर सोनीपत गए हुए थे। बवाना नहर में स्नान के बाद वे कपड़े बदलने जा रहे थे, तभी कुलश्रेष्ठ ने एक बच्चे को नहर में डूबते देखा। विशाल (7) नाम के बच्चे की चप्पल नहर में गिर गई थी और उसे निकालने की चाह में वह धार में फंस गया। कुलश्रेष्ठ ने नमन को इस बारे में बताया तो नमन ने 12 फुट गहरी नहर में छलांग लगा दी। विशाल के कपड़े पकड़ कर नमन ने उसे बाहर निकाल लिया। बचपन से ही तैराकी कर रहे नमन को इसका गहरा शौक है। सरस्वती विहार के सर्वोदय विद्यालय के छात्र रहे नमन 12वीं पास करने के बाद इन दिनों नैशनल इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग सेंटर में हेल्थ ऐंड सैनिटरी इंस्पेक्टर का कोर्स कर रहे हैं।

भाई-बहन ने चोरों को पकड़ा
दिल्ली में मालवीय नगर निवासी कृष्ण और रश्मि जॉब करते हैं। दोनों 8 दिसंबर 2015 कभी नहीं भूल पाते। इस दिन उनकी बेटी अक्षिता शर्मा और बेटे अक्षित शर्मा स्कूल से घर पहुंचे तो घर का लोहे का दरवाजा खुला मिला, लेकिन लकड़ी का दरवाजा बंद था। बच्चों को यह असामान्य लगा तो उन्होंने दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई आवाज नहीं आई। रोशनदान से देखने पर पता चला कि अंदर चोर हैं। तभी चोर भागने लगे और दोनों बच्चों ने चोरों को जोर से पकड़ लिया और चिल्लाने लगे। शोर सुन पड़ोसी पहुंचे और चोरों को पकड़ लिया गया। अक्षिता और अक्षत का कहना है कि चोरों के पास हथियार था और उन्होंने इससे मारा भी था। पुरानी बातों को अलग रख अब अक्षिता सीए बनना चाहती हैं, जबकि अक्षित इंजीनियर।

बदमाशों के मंसूबों को नाकाम किया
लखनऊ में मणियांव स्थित भरतपुर निवासी शशिकांत पांडे और लल्ली पांडे की बेटी अंशिका पांडे (14) आम दिनों की तरह साइकल पर स्कूल जा रही थीं। घर से थोड़ी दूर पर एक एसयूवी चालक ने पता पूछने के बहाने अंशिका को रोका। अंशिका पता बताने लगी तो चालक ने कहा कि पीछे बैठे साहब को बता दीजिए। वह पीछे बैठ शख्स को पता बताने लगी तो उस शख्स ने अंशिका को कार में खींचने की कोशिश की। अंशिका ने अपने पैर दरवाजे में फंसा दिए।

उस व्यक्ति ने पहले एक बोतल खोलने की कोशिश की, जिसमें शायद ऐसिड था। फिर इसमें सफल न होने पर पीछे बैठे शख्स ने चाकू से वार किया। अंशिका का हाथ जख्मी हो गया लेकिन वह मुकाबला करती रही। तभी अंशिका की एक सहेली आ गई, जिससे बदमाश भाग गया। डॉक्टर बनने की चाह रखने वाली अंशिका का मानना है कि इस तरह की स्थिति जिस भी लड़की के साथ हो, समाज उसकी आजादी न छीने।

भारत अवॉर्ड
अरुणाचल प्रदेश की तार पीजू (8) ने दो सहेलियों को डूबने से बचा लिया, पर खुद नदी की तेज धारा में बह गई। बच्ची को मरणोपरांत सम्मान दिया गया।

गीता चोपड़ा अवॉर्ड
पश्चिम बंगाल की तेजस्विता प्रधान (17) और शिवानी गोंद (16) स्टूडेंट्स अगेंस्ट ट्रैफिकिंग क्लब की मेंबर हैं और इनकी मदद से अंतरराष्ट्रीय सेक्स रैकेट का पर्दाफाश हुआ।

संजय चोपड़ा अवॉर्ड
सुमित ममगाई (15) उत्तराखंड के रहने वाले हैं और गुलदार के हमले से अपने मित्र का जीवन बचाया। गुलदार की पूंछ पकड़कर सुमित ने उस पर दरांती से वार किया तो गुलदार भाग गया।

बापू गैधानी अवॉर्ड
मिजोरम की रोलुआपुई (13) ने नदी से सहपाठी को निकाला, पर खुद भंवर में फंस गई थी। मरणोपरांत सम्मान दिया गया। छत्तीसगढ़ के तुषार वर्मा (15) को पशुशाला में लगी आग से पशुओं को बचाने के लिए पुरस्कार दिया गया।

एच लालरियातपुई (13) ढलान से लुढ़कती कार से छोटे भाई को बचाने की कोशिश में खुद कार के नीचे आ गई। मरणोपरांत पुरस्कार दिया गया। राजस्थान के सोनू माली (9)ने नाग सांप के हमले से सहपाठी को बचाया था। हिमाचल प्रदेश के प्रफुल्ल शर्मा (11) ने पहाड़ी में लुढ़कती बस में ब्रेक लगाकर बस रोक दी। कर्नाटक की सिया (10) ने अपने भाई को, जबकि मणिपुर के एम. सदानंदा सिंह ने मां को करंट की चपेट में आने से बचाया। महाराष्ट्र के जलगांव की निशा दिलीप पाटिल (16) ने आग की चपेट में आने से बच्चे को बचाया था।

केरल से बदरुनिसा के.पी. (15), अखिल के. शिबु (16), आदित्यन एमपी पिल्लई (14) और बिनिल मंजली (15), असम के टंकेश्वर पीगू (16), छत्तीसगढ़ की कुमारी नीलम ध्रुव (8), उड़ीसा के मोहन सेठी (11), नगालैंड के थंगिलमंग लंकिम (10), जम्मू-कश्मीर की पायल देवी (12) ने पानी में डूबते लोगों को बचाया था। पायल को मरणोपरांत पुरस्कार दिया गया।

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