केंद्र सरकार साइंस और मैथ्स जैसे सब्जेक्ट पढ़ाने वाले मदरसों में मिड-डे मील देगी

केंद्र सरकार उन मदरसों के स्टूडेंट्स को मिड-डे मील देगी, जहां साइंस और मैथ्स जैसे सब्जेक्ट पढ़ाए जाते हैं। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मंगलवार को माइनोरिटी कमीशन की एनुअल कांफ्रेंस के बाद एलान किया। उन्होंने कहा कि मदरसों के रिप्रेजेंटेटिव्स के साथ एक मीटिंग की गई और इस मसले पर सुझाव भी मांगे गए। बता दें कि केंद्र ने ये एलान उस वक्त किया है, जब यूपी समेत 5 राज्यों में चुनावों की तारीख तय हो चुकी है।

मदरसों को अलग ना समझें
– नकवी ने कहा, “ये सोचना गलत है कि मदरसे भारत का हिस्सा नहीं हैं। ज्यादातर मदरसों में बहुत अच्छा काम किया जा रहा है।”
– उन्होंने कहा, “मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन (MEAF) की जनरल बॉडी मीटिंग में मिड-डे मील का फैसला लिया गया। ग्रांट देने का फैसला भी लिया गया।”
– “जो मदरसे मेनस्ट्रीम एजुकेशन यानी साइंस और मैथ्स जैसे सब्जेक्ट्स पढ़ाते हैं, उन्हें केंद्र मदद करेगा। ऐसे मदरसों में मिड-डे मील दी जाएगी। ये फैसला करीब एक सप्ताह से भी पहले ले लिया गया था।”

मोदी सरकार में कम हुई हैं सांप्रदायिक घटनाएं
– नकवी ने कहा, “32 महीने की मोदी सरकार के दौरान सांप्रदायिक घटनाओं में काफी कमी देखने को मिली है।”
– “मोदी सरकार देश में ऐसा माहौल बना रही है, जिसमें अल्पसंख्यक तबका देश की डेवलपमेंट प्रोसेस का हिस्सा बन रहा है।”
– “करीब-करीब हर 6 महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुए इलेक्शन के दौरान सरकार की जिम्मेदारी को परखा गया। सरकार अल्पसंख्यकों की मजबूती के लिए ईमानदारी से काम कर रही है।”
– “अल्पसंख्यकों के लोकतांत्रिक अधिकार देश में पूरी तरह सुरक्षित हैं और कोई भी उन्हें कमजोर नहीं कर सकता है।”
– “मोदी सरकार के दौरान सांप्रदायिक घटनाओं में भारी कमी देखने को मिली है। इस दौरान कोई भी ऐसी बड़ी घटना नहीं हुई है।”
– “2013-14 के बीच राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को 2,638 कम्प्लेंट मिली थीं। लेकिन, 2014-15 में इनका आंकड़ा घटकर 1995 ही रह गया।”
– “सरकार हर उस घटना को रोकना चाहती है, जो देश के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करती है।”

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