विधानसभा सत्र के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई से उच्च न्यायालय का इनकार

दिल्ली

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विधानसभा के शुरू हो चुके दो दिनी शीतकालीन सत्र को जारी रखने से आप सरकार को रोकने की मांग वाली याचिका पर आज सुनवाई करने से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति बी डी अहमद और न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की पीठ ने कहा, विधानसभा अध्यक्ष को सत्र बुलाने का विशेषाधिकार है. अदालत इसमें कैसे हस्तक्षेप कर सकती है.

वकील आर पी लूथरा के माध्यम से आज फौरन सुनवाई के लिए इस मामले का पीठ के समक्ष उल्लेख किया गया था. वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि दो दिनी विधानसभा सत्र को अवैध और गैरकानूनी घोषित किया जाए.

हालांकि पीठ ने मामले को आज के लिए सूचीबद्ध नहीं किया और कहा, आप याचिका दाखिल करें। यह कल आएगी. याचिका में दावा किया गया कि दिल्ली विधानसभा को संबोधित करने के लिए उपराज्यपाल को आमंत्रित नहीं करके आप सरकार उनके पद का अपमान कर रही है.

इसमें कहा गया है कि नियमों के अनुसार प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र के आरंभ में उपराज्यपाल सदन को संबोधित करेंगे. याचिका के अनुसार, दिल्ली विधानसभा के गठन के बाद से इस नियम का पालन किया जा रहा है. लेकिन मौजूदा सरकार ने नियमों की अवहेलना की है.

विधानसभा के चालू चौथे सत्र के छठे चरण की कल शुरूआत हुई. सदन में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि नये उपराज्यपाल अनिल बैजल को वर्ष के पहले सत्र के संबोधन के लिए आमंत्रित नहीं करके सरकार ने नियमों का उल्लंघन और दुरपयोग किया है.

उन्होंने दिल्ली विधानसभा के नियमों के खंड 19 :1: का हवाला देते हुए कहा कि नियम के अनुसार प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र के आरंभ में उपराज्यपाल सदन को संबोधित करेंगे. हालांकि विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने गुप्ता के आरोप को खारिज करते हुए कहा था कि यह बैठक नये कलैंडर वर्ष में नया सत्र नहीं है बल्कि चालू सत्र का हिस्सा है। मैं आपको भ्रामक दावों के आधार पर उपराज्यपाल का नाम नहीं घसीटने की चेतावनी देता हूं.

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