नोटबंदी के दौरान सहकारी बैंकों में हुए घोटाले, RBI अनजान

आठ नवंबर को नोटबंदी के बाद सहकारी बैंकों में बड़े पैमाने पर लेनदेन में अनियमितता, धांधली और घोटाले का मामला सुर्खियों में था। लेकिन अब नई बात सामने आई है कि भारतीय रिजर्व बैंक को इसकी जानकारी ही नहीं है। मुंबई के एक आरटीआई कार्यकर्ता के सवालों के जवाब में आरबीआई की ओर से बताया गया है कि सहकारी बैंकों में हुई अनियमितता की जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है।

नोटबंदी के एलान के कुछ ही दिन बाद सहकारी बैंकों में लेनदेन में करेंसी बदलने का आरोप लगा जिसके चलते इन बैंकों को नई करंसी से दूर रखा गया था। आरटीआई कार्यकर्ता ने आरबीआई से उन सहकारी बैंकों की जानकारी मांगी थी जहां आठ नवंबर से दस दिसंबर 2016 तक लेनदेन में अनियमितता पाई गई थी।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी मांगी थी कि जिन बैंकों में अनियमितता उजागर हुई है उनके खिलाफ को गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा दिया जाए।आरटीआई कार्यकर्ता के इस सवाल के जवाब में केंद्रीय जन सूचना अधिकारी ए.जी.रे ने कहा हैं कि राज्य एवं जिला सहकारी बैंकों के बारे में मांगी गई जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है, जबकि शहरी सहकारी बैंकों से संबंधित जानकारी दूसरे विभाग द्वारा दी जाएगी।

जिला सहकारी बैंकों की शाखाओं में नोट बदलने पर रोक लगा दी थी
आपको बता दें 14 नवंबर 2016 को आरबीआई ने आदेश जारी कर सभी जिला सहकारी बैंकों की शाखाओं में एक हजार और 500 के नोट बदलने पर रोक लगा दी थी। आरबीआई को इन बैंकों से लगातार गड़बड़ी कर अपने परिचितों के नोट बदलने की शिकायत मिल रही थी।

आरटीआई कार्यकर्ता का कहना हैं कि  जब कोई जानकारी आरबीआई के पास नहीं है तब फिर इन बैंकों पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया। आरबीआई के इस कदम से किसान और मध्यमवर्गीय लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

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