गुरुग्राम-अलवर रोड का मोह नहीं छोड़ रहा PWD, जानें क्या है वजह

पीडब्ल्यूडी विभाग ने गुरुग्राम-अलवर रोड भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को दो महीने पहले हैंड ओवर कर दिया। इसके बाद भी विभाग का इस रोड से मोह नहीं हटा है। इसका प्रमाण है रोड के रखरखाव के लिए टेंडर जारी करना। कुछ दिन पहले इस रोड के लिए एनएचएआइ ने एक कंसल्टेंट कंपनी को डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस तरह जहां दोनों एजेंसियों में टकराव की संभावना बन चुकी है, वहीं विकास कार्य भी प्रभावित होने की आशंका है।

केंद्र सरकार दो साल पहले गुरुग्राम-अलवर रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर चुकी है। इसके बाद भी दो महीने पहले तक इस रोड की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी विभाग के पास थी। पीडब्ल्यूडी विभाग से जिम्मेदारी लेने के बाद एनएचएआइ के अधिकारी कई बार रोड का निरीक्षण कर सर्वे भी कर चुके हैं। कहां-कहां फ्लाईओवर और कहां-कहां अंडरपास बनाने की आवश्यकता है। यह जानकारी जुटा डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। अब कुछ दिन पहले रोड के रखरखाव के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से टेंडर जारी करने से एनएचएआइ के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। एनएचएआइ ने पीडब्ल्यूडी विभाग से पूछा है कि जब रोड उसके हवाले फिर टेंडर किस आधार पर हुआ।

बीच का रास्ता निकालने का प्रयास शुरू
सूत्र यह भी बताते हैं कि केंद्र एवं प्रदेश में एक ही पार्टी की सरकार होने से मामले को दबाया जा रहा है। रास्ता यह निकाला जा रहा है जब तक डीपीआर तैयार होने के बाद आगे की कार्यवाही शुरू नहीं हो जाती है तब तक रोड के रखरखाव का कार्य पीडब्ल्यूडी विभाग करेगा। इससे दोनों एजेंसियों के बीच टकराव नहीं होगा। बता दें कि गुरुग्राम-अलवर रोड पर 15 से अधिक फ्लाईओवर, अंडरपास बनाए जाने हैं। यही नहीं जगह-जगह फुट ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। गुरुग्राम इलाके में सुभाष चौक से आगे से लेकर बादशाहपुर के नजदीक शहर का सबसे लंबा फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इस बारे में प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर ¨सह की केंद्रीय भूतल सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से बातचीत हो चुकी है।

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