हिमाचल प्रदेश को रेल विस्तार के लिए केंद्रीय बजट से उम्मीद

केंद्र सरकार की तरफ से 1 फरवरी को प्रस्तुत किए जाने वाले आम बजट से हिमाचल प्रदेश को कई उम्मीदें हैं। इसमें मुख्य रूप से राष्ट्रीय महत्व की भानुपल्ली-बिलासपुर-मंडी-कुल्लू-लेह रेल लाइन के लिए बजट उपलब्ध करवाए जाने पर निगाहें टिकी हंै। इसी तरह हिमाचल प्रदेश सहित अन्य पहाड़ी राज्यों के लिए नई औद्योगिक नीति के बनाए जाने की भी संभावना है। राज्य को शिमला-धर्मशाला फोरलेन प्रोजैक्ट के लिए बजट का प्रावधान करने के अलावा केंद्र प्रायोजित परियोजनाओं में बजट की राशि बढ़ाए जाने की भी उम्मीद है। इस साल रेल बजट को अलग से पेश किए जाने की परंपरा भी समाप्त हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ने की प्रदेश के हितों की पैरवी
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की तरफ से भी हिमाचल प्रदेश की मांगों के संदर्भ में मामला उठाया गया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इससे पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य नेताओं से मिलकर पहले भी हिमाचल प्रदेश के हितों की पैरवी की है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल सहित अन्य भाजपा नेता भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु से मामला उठा चुके हैं। हिमाचल प्रदेश के अलावा राष्ट्रीय हित को देखते हुए भानुपल्ली-बिलासपुर-मंडी-कुल्लू-लेह रेलवे लाइन महत्वपूर्ण है। इससे आसानी से सरहद पर रसद को पहुंचाया जा सकता है। चीन के सीमावर्ती क्षेत्र में रेल व वायु नैटवर्क को बढ़ावा देने के चलते यह रेलमार्ग महत्वपूर्ण है।

इन रेलवे लाइन के विस्तारीकरण की भी मांग
ऊना-तलवाड़ा, पठानकोट-जोगिंद्रनगर-मंडी, चंडीगढ़-बद्दी व ऊना-हमीरपुर रेलवे लाइन के विस्तारीकरण की भी राज्य ने मांग की है। भानुपल्ली-बिलासपुर-मंडी-मनाली-लेह रेलमार्ग के फाइनल लोकेशन सर्वे को ही अब तक मंजूरी मिली है, जिसको रेल और रक्षा मंत्रालय की तरफ से स्वीकृति पर मोहर लगा दी गई है। केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश सहित अन्य पहाड़ी राज्यों के लिए नई औद्योगिक नीति बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन भी किया गया है। इसकी जानकारी सांसद वीरेंद्र कश्यप की तरफ से संसद में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमन ने दी थी। इसे देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य में औद्योगिक पैकेज के रूप में 31 मार्च, 2017 तक मिल रही कैपिटल सबसिडी को जारी रखने के अलावा अन्य रियायतें मिल सकती हैं।

सिर्फ 44 किलोमीटर रेल नैटवर्क का ही विस्तार
राज्य में आजादी से लेकर अब तक सिर्फ 44 किलोमीटर रेल नैटवर्क का ही विस्तार हुआ है। हैरानी इस बात की है कि मई, 2005 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने अपने हिमाचल प्रदेश प्रवास के दौरान नंगल-तलवाड़ा रेलवे का काम वर्ष, 2008 में पूरा करने की बात कही थी लेकिन इस पर बात आगे नहीं बढ़ पाई। उस समय इस बात पर सहमति बनी थी कि नंगल-तलवाड़ा रेल लाइन के लिए 270 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। इसके बावजूद नंगल-तलवाड़ा के बजट को 50 करोड़ रुपए से घटाकर 20 करोड़ रुपए कर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंडी रैली के दौरान हिमाचल प्रदेश में रेल विस्तार के संकेत दिए थे। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य में रेल विस्तार को गति मिल सकती है।

कृषि क्षेत्र में अधिक बजट की दरकार
बागवानी हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी का मुख्य आधार है, ऐसे में बागवानी के साथ कृषि क्षेत्र को भी अधिक बजट की केंद्र सरकार से दरकार है। राज्य की बागवानी इस समय 35,000 करोड़ रुपए की है। यदि केंद्र से अधिक मदद मिले तो इसे बढ़ाया जा सकता है। देश के साथ प्रदेश के आयकर दाता भी आयकर की सीमा को बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, शहरी विकास एवं परिवहन सहित अन्य क्षेत्रों में यदि केंद्र से मिलने वाली वित्तीय मदद को बढ़ाया जाता है तो इससे प्रदेश में विकास की गति तेजी पकड़ सकती है।

वनों को बचाने की एवज में दी जा सकती है राज्य को रियायत
वनों को बचाए जाने की एवज में हिमाचल प्रदेश ग्रीन बोनस दिए जाने की मांग भी करता रहा है। यू.पी.ए. सरकार के समय तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने अपने शिमला दौरे के दौरान हिमाचल प्रदेश को ग्रीन बोनस देने की घोषणा की थी लेकिन यह मामला भी अभी तक सिरे नहीं चढ़ा है। ऐसे में उम्मीद है कि वनों को बचाने की एवज में राज्य को रियायत दी जा सकती है।

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