जमीनों की खरीद फरोख्त में धांधली रोकने के लिए आधार से जोड़ा जाएगा रिकॉर्ड

केंद्र सरकार ने जमीनों की खरीद फरोख्त में धांधली रोकने और जमीन संबंधी विवादों में कमी लाने के लिए देश भर में भू अभिलेखों को आधार से जोड़ने का फैसला किया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय का कहना है कि हरियाणा के जींद में इसे प्रयोग के तौर पर शुरु किया गया है। जल्द ही इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। जमीनों का रिकार्ड आधार से जोड़ने के बाद पूरा डाटाबेस बैंकों, वित्तीय संस्थाओं व राष्ट्रीय बीमा पोर्टल से भी समेकित किया जाएगा।

गड़बड़ी रोकने की कवायद
सरकार का मानना है कि अधार से जोड़ने के बाद जमीन का सटीक डाटाबैंक तैयार करने में मदद मिलेगी। हालांकि जिन लोगों के पास आधार नहीं है उनका अलग से डाटा बैंक तैयार किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि योजना को मंत्रालय भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत कई तरह के प्रयास कर रहा है जिससे गड़बड़ी रुकेगी और ज्यादा पारदर्शिता के साथ विवाद भी कम होंगे। विवाद होने पर एकीकृत भूमि सूचना प्रबंधन प्रणाली से एक एजेंसी से दूसरे एजेंसी को अपेक्षित सूचनाएं आनलाइन भेजी जा सकेंगी।

जमीन की यूनीक आईडी से मिलेगा ब्यौरा
सूत्रों ने कहा हर जमीन का एक यूनीक आईडी नंबर होगा। इससे बैंकों को पूरी जानकारी मिल जाएगी कि जमीन किस व्यक्ति की है और इस दस्तावेज पर पहले कोई लोन लिया गया होगा तो इसका पता भी चला जाएगा। नहीं है। कई बार लोग एक ही प्रापर्टी पर अलग अलग बैंकों से एक से ज्यादा बार लोन लेने में सफल हो जाते हैं। सरकार का मानना है कि इस कदम से जमीनों के फर्जी दस्तावेज के आधार पर भी ऋण लेने वालों पर लगाम कसी जा सकेगी।

यह भी फायदे होंगे
सूत्रों ने कहा कि आधार से जुड़ने के बाद एक व्यक्ति के पास कितनी जमीन है इसका पूरा ब्यौरा एकत्र हो जाएगा। कल्याणकारी योजनाओं व फसल बीमा योजना के तहत भी समेकित डाटा का उपयोग बैंक कर पाएंगे। मंत्रालय का कहना है कि आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत कोशिश हो रही है कि अगर किसी जमीन पर राजस्व संबंधी मामले अदालतों में चल रहे हैं तो इसकी भी जानकारी कोई भी व्यक्ति आनलाइन हासिल कर सके। इससे विवादित जमीन दूसरों को बेंचना आसान नहीं होगा।

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