अब सेना के डॉक्टर्स हुए नाराज, रिटायरमेंट की उम्र न बढ़ने से हुए नाराज

अर्धसैनिक बलों के जवान अच्छा खाना नहीं मिलने से नाराज हैं तो सैन्य बलों में कार्यरत डाक्टर इस बात को लेकर नाराज हैं कि उन्हें 58 साल में सेवानिवृत्त कर दिया जा रहा है। जबकि केंद्र सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा के डाक्टरों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 साल कर दी है।

आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सविर्सेज के जरिये सेना, नौसेना एवं वायुसेना के कार्मिकों, पूर्व सैनिकों तथा उनके परिजनों को चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसके तहत देश भर में तीनों सेनाओं के करीब डेढ़ सौ छोटे-बड़े अस्पताल हैं। लेकिन वे डाक्टरों एवं विशेषज्ञों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। कुछ समय पूर्व सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में डाक्टरों की भारी कमी और उनके तेजी से सेवा छोड़ने पर चिंता प्रकट की थी।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार डाक्टरों के सेवा छोड़ने की एक प्रमुख वजह यह भी है कि यहां 58 साल के बाद सेवानिवृत्त कर दिया जाता है। जबकि अन्य सरकारी महकमों में अब यह आयु बढ़ाकर 65 साल कर दी गई है। 31 मई को केंद्र सरकार ने जब डाक्टरों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 साल की थी तो सेना के मेडिकल एवं डेंटल कोर के डाक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस मामले पर पूछा तो सरकार ने सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने का यह कहकर विरोध किया था कि इस मामले में खुद सेना नियम बनाती है। मामला अब सैन्य बलों के ट्रिब्यूनल के पास है।

डाक्टरों का आरोप है कि सेना के अधिकारी उनकी सेवाविृत्ति की उम्र बढ़ाने का विरोध करते हैं जिसके चलते मंत्रालय इस मामले में फैसला नहीं ले पा रहा है। इसी कारण से मेडिकल कोर में नए डाक्टरों की भर्ती भी कम हो रही है औ पहले से कार्यरत डाक्टर सेवा भी छोड़ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सैन्य बलों के डाक्टरों में इस मुद्दे को लेकर काफी नाराजगी है। इस मामले में कई ज्ञापन भी प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्री को भेजे जा चुके हैं।

Share With:
Rate This Article