मोबाइल वॉलेट और UPI को लेकर बैंक और कंपनियों में ठनी

अगर पर डिजिटल ट्रांजैक्शन मोबाइल वॉलेट या फिर बैंकों के यूपीआई से करते हैं, तो आपको अलर्ट होने की जरूरत है। यूपीआई ऐप से होने वाले फ्रॉड पर कवर कौन दे इसको लेकर बैंकों और एनपीसीआई में ठन गई है। ऐसे में अगर आपके साथ ट्रांजैक्शन करते वक्त फ्रॉड होता है, तो आपको क्लेम पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

क्या है मामला

इंडस्ट्री से मिली जानकारी के अनुसार अभी फ्रॉड कवर देने को लेकर कन्फ्यूजन है। ऐसा इसलिए है कि बैंकों ने यूपीआई ऐप के जरिए कस्टमर को ट्रांजैक्शन देना शुरू कर दिया है। जिसे नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने डेवलप किया है। मामला यही पर फंस रहा है। बैंक कह रहे हैं, कि अगर किसी यूजर के साथ यूपीआई ऐप की वजह से फ्रॉड हुआ तो उसकी भरपाई एनपीसीआई को करनी चाहिए। सूत्रों के अनुसार इस मामले में एनपीसीआई का कहना है कि बैंक के कस्टमर के साथ फ्रॉड हो रहा है, तो उसकी भरपाई बैंक को करनी चाहिए। इस मामले में एनपीसीआई से  जब पूछा तो उनके एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया है।

SBI ने नेटबैंकिग से मोबाइल वॉलेट में ट्रांसफर किया है ब्लॉक
हाल ही में देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने मोबाइल वॉलेट में नेट बैंकिग से फंड ट्रांसफर को ब्लॉक कर दिया है। बैंक का कहना है कि उसकी सिक्युरिटी कमेटी ने नेट बैंकिंग से वॉलेट ट्रांसफर करने को सेफ नहीं पाया है। ऐसे में उसने यह कदम उठाया है।

मोबाइल वॉलेट में फ्रॉड कवर को लेकर नियम क्लीयर नहीं
पेटीएम के फाउंडर एंड सीईओ विजय शेखर शर्मा के अनुसार अभी मोबाइल वॉलेट कंपनियां अपने लेवल फ्रॉड कवर देती है। यानी अगर किसी यूजर के साथ फ्रॉड हो जाता है, तो कंपनियों ने उसकी भरपाई के लिए इन्श्योरेंस कवर करा रखा है।

RBI जारी कर सकता है नई गाइडलाइन
सूत्रों के अनुसार इस कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए आरबीआई मोबाइल वॉलेट कंपनियों के लिए एक गाइडलाइन भी जारी करने की तैयारी में है। जिसमें फ्रॉड होने पर कस्टमर को क्या करना चाहिए, कहां शिकायत करना चाहिए उसका पूरा मैकेनिज्म बनाया जाएगा। साथ ही फ्रॉड की जिम्मेदारी किसके पास होगी, यह सब क्लीयर होगा।

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