चीन की परमाणुशक्ति-चालित पनडुब्बी को देखा गया कराची में, भारत के लिए ‘असुविधा’

पाक की हर नापाक चाल पर उसके साथ खड़ा हो रहा चीन अपनी कुटिल चाल से बाज नहीं आ रहा. एक नई सेटेलाइट तस्वीर में सामने आई है जिसे लेकर चर्चा है कि पिछले साल परमाणु हमले के लिए सक्षम चीन की पनडुब्बी पाकिस्तान में कराची के हार्बर में मई 2016 में तैनात देखी गई.

इस तस्वीर से ऐसा माना जा रहा है कि चीन भारत की युद्ध नीति, क्षमता और ताकत को आंकने के लिए ही भारतीय सीमा के बेहद करीब से भारत पर नजर रख रहा है. एक अंग्रेजी वेबसाइट के अनुसार, इस परमाणु क्षमता से लैश पनडुब्बी को लंबे समय तक समुद्र के भीतर तैनात रखा जा सकता है क्योंकि इसमें बार-बार ईंधन भरने की जरूरत नहीं होती. इतना ही नहीं टारपीडो और क्रूड मिसाइलों से लैस इस पनडुब्बी को पानी के अंदर अत्यन्त ही विषम परिस्थितियों तैयान रखा जा सकता है और दुश्मन के लिए इसका पता लगाना भी आसान नहीं होता.

सेटेलाइट इमेजरी एक्सपर्ट @rajfortyseven अकाउंट से यह सेटेलाइट तस्वीर जारी की गई है. इस तस्वीर में दिख रही पनडुब्बी के बारे में कहा जा रहा है कि यह चाइनीज नैवी टाइप 091 Han क्लास फर्स्ट अटैक पनडुब्बी है जो परमाणु हमला करने में सक्षम है.

परमाणु क्षमता से लैस इस पनडुब्बी में 533 एमएम के छह टारपीडो ट्यूब होते हैं और यह हर समय 20 टारपीडो मिसाइलों से लैस होती है. टारपीडो ट्यूब में 36 माइन्स को तैनात किया जा सकता है. यह पनडुब्बी एंटीशिप मिसाइल लांच करने में भी सक्षम होती है. इसका कुल वजन करीब साढ़े पांच हजार टन, लंबाई 98 मीटर और इसकी स्पीड 40 किमी प्रति घंटे होती है. हालांकि यह पनडुब्बी काफी ज्यादा आवाज करती है और इसका रेडिएशन स्तर भी बहुत ज्यादा होता जो नुकसान देह है.

नौसेना विशेषज्ञों का मानना है कि गूगल अर्थ से देखी गई तस्वीर में जो पनडुब्बी है वह टाइप 093 शांन्ग भी हो सकती है. क्योंकि यह पनडुब्बी शोर कम करती है और इसका पता लगाना भी दूसरों लिए मुश्किल होता है.

यह पनडुब्बी टाइप 091 के मुकाबले ज्यादा सक्षम होती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इससे आवाज कम होती है और इसकी तैनाती का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है. इसमें भी 533 एमएम के छह टारपीडो ट्यूब दो नीचे और चार ऊपर की ओर होते हैं जिनमें परमाणु क्षमता वाली सबमैरीन मिसाइलें तैनात होती हैं. टाइप 093 शान्ग में उच्च क्षमता वाली cj-10, 12 एंटी शिप मिसाइलें तैनात की जा कसते हैं. इसका वजन करीब सात हजार टन, और लंबाई 110 मीटर होती है. इसकी स्पीड 30 किमी प्रति घंटा होती है.

रक्षा विषेज्ञों की मानें तो चीन की ओर से हिंद महासागर में पनडुब्बी तैनात करना उसकी हताशा को दर्शाता है. चीन ऐसा इसलिए कर रहा है कि क्योंकि वह भारत की क्षमता को पता लगाकर हर कीमत में भारतीय सेना से खुद को आगे रखना चाहता है.

इसके अलावा चीन ऐसा भारतीय सुरक्षा को चुनौती देने के लिए भी कर सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नौसेना के चीफ एडमिरल सुनील लांबा ने कहा है कि भारतीय नौसेना भी पाकिस्तान नौसेना की हर गतिविधि पर करीब से नजर रखती है.

पाकिस्तान की गतिविधयों को एअरक्राफ्ट और समुद्री जहाजों के जरिए एक अभियान के तहत नजर रखी जा रही है. बताया जा रहा है कि परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बियों पर तभी काबू पाया जा सकता है कि जब कि उसकी रसद सामग्री खत्म हो या उसमें कोई तकनीकी खराबी आ जाए. इसके लिए पनडुब्बी को काबू करने के लिए कोई और उपाए नहीं है. साथ ही न्यूक्लियर पनडुब्बी अन्य परंपरागत पनडुब्बियों के मुकाबले कहीं ज्यादा शक्तिशाली होती है. इससे ज्यादा लंबे समय तक ऑपरेशन को अंजाम दिया जा कसता है.

हालांकि इससे पहले भी चीनी पनडुब्बियां हिंद महासागर की सीमा में देखी जा चुकी हैं जिस पर चीन की सफाई थी कि सोमालिया कोस्ट गार्ड में जासूसी पर लगाम कसने के लिए वह ऐसा कर रहा है.

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