किन बैंकों को कितनी रकम दी गई, जानकारी देने से RBI ने किया इंकार

मुंबई

8 नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद किन बैंकों को कितनी रकम दी गई? सवाल बहुत सीधा है, मगर भारतीय रिजर्व बैंक के अफसरों को शायद ऐसा नहीं लगता. आरबीआई ने बैंकों को बांटे गए नोटों का ब्योरा देने से इनकार कर दिया है.

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने आरबीआई से जानकारी मांगी थी कि किन बैंकों को कितनी रकम दी गई. आरबीआई के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी पी विजय कुमार ने बैंकों को जारी की गई रकम पर मौन साध लिया है. उन्होंने गलगली को बताया कि आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 8(1) (जी) के तहत यह सूचना सार्वजनिक नहीं की जा सकती. इस अपवाद के अनुसार, ऐसी सूचना प्रकट नहीं की जा सकती, जहां किसी व्यक्ति का जीवन या शारीरिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाये. तथा जो विधि प्रर्वतन या सुरक्षा प्रयोजन को विश्वास में दी गई सूचना या सहायता के स्त्रोत की पहचान करा दे.

गलगली ने आरबीआई के इस तर्क को विवेकरहित और बेहूदा बताया है. उन्होंने आरबीआई की मुद्रा प्रबंध विभाग की कार्यपाल निदेशक डॉ दीपाली पंत जोशी के पास इस फैसले को चुनौती दी हैं. उन्होंने पूछा है कि बैंकों को दी गई धनराशि तो ग्राहकों को बंट भी गई. इस जानकारी को सार्वजनिक करने से किस व्यक्ति की जीवित या शारीरिक सुरक्षा खतरा में पड़ रही है?

अनिल गलगली का मानना है कि नोटबंदी के दौरान सरकारी बैंकों की तुलना में निजी बैंकों को शायद अधिक रकम दी गई, जिससे नोट की अदला-बदली आरबीआई की निर्धारित सीमा से अधिक काल के लिए जारी रही. ऐसा न हुआ होता, तो चंद लोगों के पास बड़े पैमाने पर नई करंसी कैसे बरामद होती? इसलिए यह जानकारी सार्वजनिक करना आम जनता के जनहित से जुड़ा है. आम आदमी अभी भी एटीएम और बैंकों के सामने लाइन लगाए हुए परेशानी का सामना कर रहा. नोटों के वितरण में आरबीआई ने पारदर्शी तरीका अपनाया है, इस बारे में जनता को आश्वासित किया जाना बेहद जरूरी है.

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