11 सालों में करोड़ों खर्च, नहीं मिला फसली चक्र से छुटकारा

11 सालों में करोड़ों खर्च, नहीं मिला फसली चक्र से छुटकारा

फतेहाबाद

परम्परागत खेती से किसानों को छुटकारा दिलवाने व अच्छी आमदनी के लिए 65 फीसदी अनुदान पर प्रदेश व केंद्र की सरकार ने पॉलीहाऊस लगाने की शुरूआत की थी लेकिन इसका फायदा चंद ही किसान उठा पाए.

यह योजना ठेकेदारों की बदौलत किसानों तक नहीं पहुंच पाई। पूरे प्रदेश की बात करें तो अब तक 22 हजार एकड़ में ही पॉलीहाऊस लगे हैं. पॉलीहाऊस लगाने की टैक्नीक विदेशों से ईजाद की गई थी. इस पर प्रति एकड़ अनुमानित लागत 32 से 37 लाख रुपए तक थी, जिसमें 50 फीसदी अनुदान राज्य सरकार का था और 15 फीसदी अनुदान केंद्र सरकार का था.

कुल 65 फीसदी अनुदान पर यह पॉलीहाऊस लगने थे, सैंकड़ों किसानों ने रुझान भी दिखाया और ट्रेङ्क्षनग भी ली लेकिन मंडीकरण के डर से किसान पॉलीहाऊस से पीछे हटे. किसानों का तो मानना है कि यह योजना किसानों के लिए कम लाभकारी साबित हुई लेकिन पॉलीहाऊस लगाने वाली कम्पनियों के लिए यह ज्यादा फायदेमंद साबित हुई. किसानों का रुझान कम हो गया.

पॉलीहाऊस लगाने की योजना किसानों के लिए बहुत फायदेमंद थी क्योंकि इसमें आफ सीजनल सब्जियां उगाने से लाखों रुपए का फायदा होता है. हरियाणा में जितने भी पॉलीहाऊस लगे हैं और अधिकतर खीरा और टमाटर की फसल ही उगाई जा रही हैं. खीरे की फसल & महीने का समय लेती है और किसान को अढ़ाई से 4 लाख रुपए की आमदनी दे जाती है.

Share With:
Rate This Article
No Comments

Leave A Comment