नए साल पर गरीबों-किसानों और मध्यमवर्ग के लिए PM मोदी का तोहफा

दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी दिल्ली से नव वर्ष की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया. पीएम मोदी ने अपने भाषण में गरीब, निम्न और मध्यम वर्ग के लिए कई घोषणाएं की हैं. महिलाओं के लिए भी पीएम मोदी ने तोहफे का पिटारा खोला है. पीएम मोदी ने छोटे कारोबारियों को भी नए वर्ष का ईनाम दिया है. साथ ही कालाधन रखने वालों के खिलाफ उन्होंने कहा कि उन्हें बख्शा नहीं जाएगा.

वरिष्ठ नागरिकों की अगले 10 वर्षों तक बैंकों में जमा साढ़े सात लाख रुपये की राशि पर 8 प्रतिशत का ब्याज दिया जाएगा, जिसे हर साल वे निकाल भी सकेंगे. छोटे कारोबारियों के लिए बैंक 20 फीसदी कैश/क्रेडिट लिमिट से बढ़ाकर 25 फीसदी करें.

हर गरीब का अपना आशियाना हो, हर निर्धन के सिर पर छत हो, इसके लिए ब्याज दरों में ज़बरदस्त कटौती. शहरी गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना में 9 लाख रुपये के कर्ज पर ब्याज में 4% और 12 लाख पर 3% की छूट दी जायेगी.

मैं देश के युवाओं से, व्यापारियों से, किसानों से आग्रह करता हूं कि भीम ऐप को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल में लाएं. आज आवश्यकता है कि सभी राजनेता और राजनीतिक दल राजनीति से ऊपर उठकर मिलके पारदर्शिता लाएं और उसके लिए सही कदम उठाएं.

गर्भवती महिलाओं को 6000 रुपये की सहायता दी जाएगी. सहयता राशि उनके खातों में जमा कराई जाएगी. छोटे कारोबारियों के लिए क्रेडिट गारंटी एक करोड़ से बढ़ा कर दो करोड़ रुपये होगी.

अगले 3 महीने में 3 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड को RuPay कार्ड में बदला जाएगा. इससे बैंक न जाकर कहीं पर भी किसान खरीद-बिक्री कर सकेगा. डिस्ट्रिक्ट कॉपरेटिव सेंट्रल बैंक और प्राइमरी सोसायटी से जिन किसानों ने खरीफ और रबी की बुवाई के लिए कर्ज लिया था. उस कर्ज के 60 दिन का ब्याज सरकार वहन करेगी और किसानों के खातों में ट्रांसफर करेगी.

इस अभियान की सफलता इस बात पर भी है कि अर्थव्यवस्था से बाहर जो धन था वो बैंक के जरिये अर्थव्यवस्था में वापस आ गया है. 9 लाख तक के होम लोन पर 4 प्रतिशत की छूट और 12 लाख पर 3 प्रतिशत की छूट मिलेगी.

2017 में जो लोग गांव में अपने घर बनाना चाहते हैं, उन्हें दो लाख तक के ऋण में तीन परसेंट की छूट दी जाएगी. प्रधानमंत्री योजना के तहत 35 फीसदी ज्यादा घर बनाए जाएंगे. सबका साथ, सबका विकास को ध्यान में रखते हुए सरकार नए साल पर कुछ नए कदम उठा रही है.

गांव-गरीब, किसान, दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित और महिलाएं जितनी सशक्त होंगी, देश उतना ही मजबूत बनेगा, विकास भी उतना ही तेज होगा. पंडित दीन दयाल की जन्मशती के अवसर पर बैंक भी जनहितैषी उचित कदम उठाएं.

बैंक गरीब और निम्न वर्ग को केंद्र में रखकर अपना काम करें. देश की बैंकिंग सिस्टम के लिए स्वर्णिम अवसर है। इतिहास गवाह है कि भारत में इतनी मात्रा में कम समय में इतना धन नहीं आया था. बैंक कर्मियों ने सराहनीय काम किया है, दिन-रात काम किया है. इस दौरान कुछ बैंकों में गंभीर अपराध सामने आए हैं. कुछ कर्मियों ने गंभीर अपराध किए हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा.

अर्थव्यवस्था के बाहर वाला धन भी अर्थव्यवस्था में आ गया है. दोस्तों पूरी दुनिया में एक सर्व सामान्य तथ्य है कि आतंकवाद, नक्सलवाद, आदि बुराईयों से जुड़े लोग कालेधन पर ही निर्भर रहते हैं। नोटबंदी ने इन सभी पर चोट पहुंचाई है. सरकार में बैठे छोटे-बड़े व्यक्ति की जिम्मेदारी आम आदमी के अधिकारों की रक्षा करने की है.

ये सरकार सज्जनों की मित्र है और दुर्जनों को सच्चाई के रास्ते पर लाने के लिए कटिबद्ध है. कानून उसका काम करेगा, लेकिन सरकार की प्राथमिकता है ईमानदारों की कठिनाईयां कैसे कम हों।. बड़े मकान और बड़ी गाड़ियां देखकर अंदाजा लग जाएगा कि 10 लाख से आय वाले लाखों लोग हैं.

सरकार के पास दर्ज की गई जानकारी के हिसाब से 24 लाख लोग स्वीकार करते हैं कि उनकी सालाना आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है. नकद में कारोबार करने को मजबूर अनेको नागिरकों ने कानूनों का पालन करते हुए मुख्यधारा में आने का प्रयास किया है और सरकार भी इसके लिए तैयार है.

अगर आज लाल बहादुर शाष्त्री होते, जेपी होते, लोहिया होते, कामराज होते तो देशवासियों को आशीर्वाद देते. हमरा प्रयास है कि नकदी और कैश संतुलन बना रहे. हमारी अर्थव्यवस्था में बेतहाशा बढ़े हुए नोट मंहगाई बढ़ा रहे थे, कालाधन बढ़ा रहे थे, आम आदमी से उसका अधिकार छीन रहे थे.

भारत ने जो करके दिखाया है, विश्व में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है. नव वर्ष में बैंकिंग व्यवस्था को सामान्य करने के लिए कहा गया है. खासकर गांवों में हालात सामन्य किए जाएं. आपने मुझे अपना मानकर बातें कही हैं. भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ लड़ाई में आप एक कदम भी पीछे नहीं हटना चाहते हैं.

यह पहली बार है जब जनता और सरकार ने मिलकर लड़ाई लड़ी. जब अच्छाई के लिए आंदोलन होते हैं तो जनता आमने-सामने होते हैं. भारत के उज्जवल भविष्य के लिए देशवासियों ने कष्ट झेला है. सन 62 की लड़ाई हो, 71 की लड़ाई हो, करगिल युद्ध हो, हमने हालातों पर विजय पाई है.

दीवाली के बाद देश के नागरिक कष्ट झेलते हुए बुराईयों को पराजित करने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, इस बात देषवाशियों ने जी कर दिखाया है. 8 नवंबर के बाद की घटनाएं हमें पुर्नविचार के लिए मजबूर करती है. सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानियों ने कष्ट झेलकर यह सिद्ध कर दिया है कि सच्चाई और ईमानदारी हमें कितनी अच्छी लगती है.

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