सोनीपतः वाटरकूलर-डस्टबिन खरीद में 1 करोड़ 12 लाख का घोटाला

सोनीपत

विकास एवं पंचायत विभाग के 5 खंड अधिकारियों द्वारा आर.ओ., वाटरकूलर, डस्टबिन व स्टेबलाइजर की खरीद फरोख्त में 1 करोड़ 12 लाख 72 हजार रुपए का घोटाला किया गया है. खंड अधिकारियों पर लगाए गए घोटाले के आरोप जांच रिपोर्ट में सही पाए गए हैं.

जांच के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं वे चौंकाने वाले हैं. हर सामान बाजार भाव से लगभग दोगुनी कीमत पर खरीदा दिखाया गया है. जो सामान करीब सवा 2 करोड़ की कीमत का होना चाहिए था, उसकी कीमत करीब साढ़े 3 करोड़ दर्शाई गई है.

यह सामान वर्ष 2015 के दौरान 14वें वित्त आयोग के तहत मिले फंड से खरीदा गया था. जांच के बाद रिपोर्ट के आधार पर सोनीपत के डी.सी. ने विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखकर विभागीय कार्रवाई किए जाने व भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत पांचों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाए जाने की अनुशंसा की है.

करीब 6 माह पहले गोहाना से भाजपा नेता रामचंद्र जांगड़ा ने जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में कहा था कि 14वें वित्त आयोग के फंड से गांवों के लिए वाटरकूलर, डस्टबिन, आर.ओ. व स्टेबलाइजर खरीदने के आदेश दिए गए थे, इसके लिए भारी-भरकम बजट भी जारी किया गया था.

आरोप लगाया गया कि इस सामान की खरीद में भारी गड़बड़झाला हुआ है तो उस समय कष्ट निवारण समिति के चेयरमैन एवं भू-गर्भ मंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले की जांच डी.सी. को स्वयं करने के आदेश दिए थे. डी.सी. के.एम. पांडुरंग ने जांच पूरी कर ली है.

जांच के आधार पर सोनीपत, राई, खरखौदा, गन्नौर व गोहाना के तत्कालीन बी.डी.पी.ओ. दोषी पाए गए हैं, क्योंकि उस समय तक ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका था और गांवों का चार्ज बी.डी.पी.ओ. के हाथों में था. सभी चारों सामान के बाजार भाव से लगभग दोगुनी कीमत पर खरीद दिखाई गई है.

वहीं, आरोपियों से भी इस संबंध में पूछताछ की गई थी लेकिन वे अपने बचाव में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए. ऐसे में डी.सी. ने अब जांच रिपोर्ट के आधार पर विकास एवं पंचायत विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव नवराज संधू को पत्र लिखकर पांचों ब्लाकों के तत्कालीन बी.डी.पी.ओ. के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज करवाने व विभागीय कार्रवाई किए जाने की अनुशंसा की है. उम्मीद की जा रही है कि शीघ्र ही सरकार सभी पांचों आरोपियों के खिलाफ कड़ा एक्शन ले सकती है।

पूनम चंदा वर्तमान में भी गन्नौर की बी.डी.पी.ओ. हैं. जांच रिपोर्ट के अनुसार उनके ब्लाक में 31 ग्राम पंचायतों के लिए 84 आर.ओ., वाटरकूलर व स्टेबलाइजर के सैट तथा 218 डस्टबिन खरीदे गए. इस सामान की खरीद 99 लाख 78 हजार 255 रुपए में दर्शाई गई है. इस कीमत में टैक्स भी शामिल है. वहीं, जांच में पाया गया इस सामान की बाजार कीमत 59 लाख 72 हजार 736 रुपए है. ऐसे में 36 लाख 51 हजार 243 रुपए की गड़बड़ पाई गई है.

राजेश कुमार वर्तमान में पानीपत में बी.डी.पी.ओ. के पद पर कार्यरत है. जांच रिपोर्ट के अनुसार उनके ब्लाक सोनीपत में 23 ग्राम पंचायतों के लिए 706 डस्टबिन खरीदे गए थे. इनकी बाजार कीमत 55 लाख 77 हजार 237 रुपए पाई गई है, जबकि इनकी खरीद उस समय 66 लाख 64 हजार 62 रुपए में दर्शाई गई है. 10 लाख 86 हजार 825 रुपए की गड़बड़ी इस खरीद में हुई है.

सुमित बख्शी 2015 के दौरान खरखौदा के बी.डी.पी.ओ. रहे हैं. उनके ब्लाक में 19 ग्राम पंचायतों के लिए 1 वाटर कूलर सैट व 833 डस्टबिन खरीदे गए, जिनकी खरीद कीमत 62 लाख 98 हजार 277 रुपए दर्शाई गई है. जबकि बाजार में इनकी कीमत मात्र 34 लाख 24 हजार 549 रुपए पाई गई. ऐसे में साढ़े 28 लाख से ज्यादा की गड़बड़ पाई गई.

गोहाना के बी.डी.पी.ओ. उस समय इकबाल सिंह राठी थे. उनके ब्लाक की 31 ग्राम पंचायतों के लिए 39 वाटर कूलर सैट व 1871 डस्टबिन की खरीद हुई. इनकी कीमत बिलों में 1 करोड़, 08 लाख 45 हजार 340 रुपए दिखाई गई है जबकि वास्तविक कीमत 72 लाख 14 हजार 27 रुपए पाई गई. करीब साढ़े 36 लाख का घालमेल पाया गया.

राई के बी.डी.पी.ओ. राम सिंह के ब्लाक के तहत 1 ग्राम पंचायत के लिए मात्र 70 डस्टबिन खरीदे गए और उनकी कीमत 5 लाख 74 हजार 700 रुपए दर्शाई गई जबकि इनकी वास्तविक कीमत 5 लाख 45 हजार पाई गई. ऐसे में करीब 29 हजार का घालमेल पाया गया.

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