कुल्लू में जान जोखिम में डाल पुल पार कर रहे लोग

कुल्लू

कुल्लू घाटी के लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ क्यों, अगर हादसा हो जाता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? कुल्लू जिला की धार्मिक नगरी मणिकर्ण स्थित छलाल, कटागड़ा और रसोल के सैंकड़ों ग्रामीण हर रोज जान जोखिम में डाल कर लकड़ी के टूटे हुए पुल से आवाजाही करते हैं.

पार्वती नदी पर बने इस पुल की हालत ऐसी हो चुकी है कि यह कभी भी बड़े हादसे को न्यौता दे सकता है. पुल की खस्ता हालत से ग्रामीण चिंतित हैं, वहीं उन्हें अपने बच्चों की चिंता भी सताती है. लकड़ी के पुल की रेलिंग जगह-जगह से टूट गई है.

स्कूली बच्चे रेलिंग को पकड़ कर ही पुल को पार करते हैं, ऐसे में पुल से आवाजाही करना खतरे से खाली नहीं है. यही नहीं पुल के बीचोंबीच लकड़ी के फट्टे सड़ गए हैं जिससे इन पर पैर रखने से कोई भी सीधे पार्वती नदी में गिर सकता है.

लोगों का आरोप है कि कई बार प्रशासन व संबंधित विभाग को इस बारे अवगत करवाया गया है लेकिन अब तक कुछ नहीं हो सका है. भले ही पुल की मुरम्मत को लेकर कई बार सरकारी घोषणाएं भी हुईं लेकिन ये कागजों के पन्नों तक सिमट कर रह गई हैं.

ग्रामीणों चंद्रेश कुमार, चेतन ठाकुर, कौशल्या देवी, लेद राम, जिंदू राम, डोले राम, कला देवी, इंद्र सिंह व जगरनाथ आदि ने कहा कि इस संदर्भ में प्रशासन और स्थानीय विधायक को अवगत करवा चुके हैं लेकिन आश्वासनों के सिवाय कुछ नहीं मिला है.

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