SC फैसले के खिलाफ अलगाववादियों ने खोला मोर्चा, जुमा नमाज के बाद किया विरोध प्रदर्शन का आह्वान

श्रीनगर  

हुर्रियत कांफ्रेंस के दोनो गुटों के प्रमुखों सैयद अली शाह गिलानी, मीरवायज उमर फारुक और JKLF प्रमुख यासीन मलिक के संयुक्त अलगाववादी नेतृत्व ने पाकिस्तानी शरणार्थियों को जारी किए गए अधिवास प्रमाण पत्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. यहां एक बयान में अलगाववादियों ने पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को अधिवास प्रमाण पत्र दिए जाने और जम्मू कश्मीर की संप्रभुता को चुनौती देने के लिए फैसले के खिलाफ शुक्रवार (23 दिसंबर) को जुमा नमाज के बाद लोगों से विरोध प्रदर्शन करने की अपील की.

एक संयुक्त बयान में अलगाववादियों ने कहा कि पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को अधिवास प्रमाण पत्र जारी किया जना, सरफेसी अधिनियम को लेकर जम्मू कश्मीर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला जम्मू कश्मीर की संप्रभुता के लिए चुनौतियां हैं.

बाहरी बैंकों को अधिहरण करने और जम्मू कश्मीर में संपत्तियां लेने की इजाजत दिए जाना मुसलमानों और कश्मीरियों के अस्तित्व के लिए जीवन और मौत के मुद्दों के बराबर हैं. PDP ने एक बार फिर से अपने कश्मीर विरोधी और मुस्लिम विरोधी एजेंडे पर काम करना शुरु कर दिया है लेकिन जम्मू कश्मीर के लोग इस तरह की कार्रवाई का विरोध करने के लिए किसी भी तरह का बलिदान देने से पीछे नहीं हटेंगे.

बता दें केंद्र सरकार ने POK के शरणार्थियों के लिए 2 हजार करोड़ का पैकेज मंजूर किया है. इन रुपयों से शरणार्थियों की मदद की जाएगी. जम्मू.कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार ने भी करीब 37000 शरणार्थी परिवारों का चुनाव कर लिया है.

इस पैकेज के जरिए सभी विस्थापित परिवारों को करीब पांच-पांच लाख रुपए अनुदान के तौर पर मिलेंगे. POK से आए ज्यादातर शरणार्थी कठुआ, जम्मू और राजौरी जिले में रहते हैं. ये शरणार्थी 1965 और 1971 युद्ध के बाद यहां आकर बसे थे. बता दें इन शरणार्थियों को विधानसभा में वोटिंग का अधिकार नहीं है लेकिन ये शरणार्थी लोकसभा चुनाव में वोटिंग कर सकते हैं.

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