चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में BJP की बड़ी जीत, 26 सीटों में से 20 सीटों पर जीत दर्ज की

चंडीगढ़

नोटबंदी के बीच आज भारतीय जनता पार्टी और पीएम नरेंद्र मोदी ने एक और लिटमस टेस्ट पास कर लिया. चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल की है. बीजेपी-अकाली दल गठबंधन ने पूर्ण बहुमत हासिल करते हुए 26 में से 21 सीटें अपने नाम कर कांग्रेस को करारा झटका दिया. कांग्रेस 4 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई. वहीं निर्दलीय को एक सीट मिली.

बीजेपी की तरफ से जीत हासिल करने वालों में प्रमुख नाम बीजेपी मेयर अरुण सूद का भी है. वार्ड नं 4 से बीजेपी की सुनीता धवन जीतीं. उन्होंने पूर्व मेयर और चंडीगढ़ कांग्रेस की सीनियर लीडर पूनम शर्मा को हराया. कुल 122 उम्मीदवार मैदान में थे. मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही था. शुरुआती रुझानों से ही बीजेपी आगे चल रही थी.

कांग्रेस और भाजपा ने सभी 26 वार्डों पर उम्मीदवार उतारे थे, जबकि बसपा ने 17 वार्डों में अपने उम्मीदवार को उतारा. इसके अलावा 67 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में थे.

इस जीत पर चंडीगढ़ से बीजेपी सांसद किरन खेर ने कहा कि जनता हमारे काम से खुश है. हमने पीएम मोदी की योजनाओं को अमली जामा पहनाया और लोग इससे खुश हैं. लोगों ने महसूस किया कि नोटबंदी की कवायद देश की बेहतरी के लिए है.

इन लोगों को लग रहा था कि नोटबंदी पर देश की जनता मोदी जी के साथ नहीं है, लेकिन चंडीगढ़ के लोगों ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है और बता दिया है कि देश के ईमानदार प्रधानमंत्री ने जो ईमानदार कदम उठाया है उसके साथ देश की जनता भी खड़ी है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह हमेशा कहते हैं ‘कांग्रेस मुक्त भारत’.

चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 36 सीटें होती हैं जिनमें से 26 सीटों पर चुनाव होता है जबकि 9 सदस्यों को पंजाब के राज्यपाल, जो चंडीगढ़ के प्रशासक भी होते हैं, वह नॉमिनेट करते हैं. चंडीगढ़ का सांसद 10वां सदस्य होता है और इस तरह कुल मिलाकर नगर निगम के 36 सदस्य होते हैं.

इन नतीजों को नोटबंदी को लेकर रेफरेंडम माना जा रहा था. चंडीगढ़ जैसा शहर जिसे स्मार्ट सिटी माना जाता है और जिस शहर में पढ़े-लिखे और राजनीति और देश के हर पहलू की समझ रखने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा है. यहां के 5 लाख मतदाताओं में से 3 लाख ने 26 वार्डों में 122 कैंडिडेट में से 26 पार्षद चुनने के लिए 18 दिसंबर को वोट डाला था.

अभी तक चंडीगढ़ नगर निगम पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा था. मेयर और तमाम पार्षद भाजपा के ही थे. अगर मुद्दों की बात करें तो इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा नोटबंदी का ही रहा. कहा ये भी जा रहा था कि वोटरों का एक बड़ा धड़ा कहीं ना कहीं नोटबंदी से नाराज है और शायद इसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़े, पर ऐसा नहीं हुआ.

चुनाव प्रचार में कांग्रेस और बीजेपी ने किसी भी तरह की कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी थी. भाजपा ने किरण खेर समेत अपने कई नामी चेहरों जिनमें अनुराग ठाकुर भी शामिल हैं, प्रचार की कमान सौंपी थी.

वही कांग्रेस की नैया पार लगाने की जिम्मेवारी चंडीगढ़ के सीनियर कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल के हाथों में थी. प्रचार के दौरान कांग्रेस ने बीजेपी पर नोटबंदी को लेकर निशाना साधा और कैश के लिए परेशान चल रहे चंडीगढ़ के लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की. वहीं भारतीय जनता पार्टी की तरफ से केंद्र से कई सीनियर नेताओं को चंडीगढ़ भेजा गया और चंडीगढ़वासियों को नोटबंदी के फायदे समझाने की कोशिश की गई.

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