लाहौल में शून्य से नीचे गिरा तापमान, खाने-पीने की चीजें बर्फ में तबदील

उदयपुर

हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लाहौल में ठंड ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है. तापमान माइनस से नीचे चले जाने के बाद किचन में रखी खाद्य चीजें बर्फ की ठोस सिल्लियों में तबदील होने लगी हैं.

यहां अभी न्यूनतम तापमान -11.2 रिकॉर्ड किया गया है. खाद्य तेल भी जहां ठोस घी बन रहे हैं वहीं अंडे तो गेंद की तरह और भी सख्त हो गए हैं. अंडों की कठोरता इतनी बढ़ गई है कि फर्श पर गिराने के बाद भी वे टूट नहीं रहे हैं. लाहौल के थिरोट में खाद्य चीजों का यह हश्र देखा जा रहा है.

थिरोट के लोगों का कहना है कि लाहौल में थिरोट सबसे ठंडा है. लाहौल में हर जगह न्यूनतम तापमान हालांकि शून्य से काफी नीचे चला गया है, लेकिन थिरोट की ठंड लोगों के लिए अभी से ही असहनीय होने लगी है.

थिरोट पावर हाऊस में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों का कहना है कि सूर्यदेव के दर्शन भी अब दुर्लभ होने लगे हैं. सूर्य उदय होने के चंद मिनट बाद ही यहां शाम ढल रही है, जिससे तापमान चढ़ने की बजाय और ज्यादा लुढ़कता जा रहा है.

थिरोट की भयंकर ठंड में राज्य विद्युत परिषद के कर्मचारियों को अब खाद्य चीजों की कमी भी यहां खलने लगी है. कर्मचारियों की मानें तो दूध और हरी सब्जियां तो थिरोट में आजकल ढूंढे नहीं मिल रही हैं. रोहतांग दर्रा फिलहाल यातायात के लिए खुला है, लेकिन थिरोट में कर्मचारियों को दूध और सब्जियों के अभी से ही लाले पडऩे लग पड़े हैं.

बताया गया है कि भयंकर ठंड के डर से कोई व्यापारी अब थिरोट में दस्तक नहीं दे रहा है, जो स्थानीय व्यापारी हैं, उन्होंने भी रोहतांग लांघते हुए कुल्लू-मनाली से सब्जियां लाने से तौबा कर ली है.

नतीजतन सब्जियां थिरोट में ढूंढे नहीं मिल रही हैं. गर्मियों के दिनों में देश की बड़ी सब्जी मंडियों को हजारों टन सब्जियां निर्यात करने वाले लाहौल में थिरोट के कर्मचारी इन दिनों सब्जियों और दूध के लिए भी तरस रहे हैं.

भयंकर ठंड के बीच थिरोट पावर हाऊस में तैनात अधिकारी और कर्मचारी लाहौल में बिजली की जगमगाहट बरकरार रखने के लिए बिजली घर के अंदर दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं. अधिकारी दूध के अच्छे दाम भी देने के लिए तैयार हैं, लेकिन दूध के दर्शन भी उनके लिए दुर्लभ हुए हैं. कार्यालयों के लिए जहां एल.पी.जी. गैस हीटर उनके लिए दिए गए हैं वहीं उनके आवासों में तंदूर लगातार धधक रहे हैं, लेकिन थिरोट की ठंड है कि कम होने की बजाय उन्हें और अधिक जकड़ रही है.

थिरोट में कार्यरत अधिकारियों ने बताया कि खाद्य तेल को इस्तेमाल में लाने से पहले पिघलाना अनिवार्य हो गया है. उन्हें गर्म पानी में पिघलाने के बाद इस्तेमाल किया जा रहा है. उनका कहना है कि भारी-भरकम कम्बलों व रजाइयों के अंदर मुंह ढक कर सोना भी यहां जरूरी हो गया है. मुंह यदि खुला रह गया तो सुबह होने तक नाक भी यहां जाम हो रही है.

Share With:
Rate This Article