नोटबंदी पर सुनवाई करेगी सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच

दिल्ली

नोटबंदी के मामले पर सुनावाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे 5 जजों की संवैधानिक बेंच को सौंप दिया है. यही नहीं कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर चल रही सुनवाईयों पर भी रोक लगा दी है. हालांकि उम्मीद जतायी जा रही थी कि 500-1000 के नोट आगे भी जारी रखने पर सुप्रीम कोर्ट कुछ निर्देश दे सकता है.

लेकिन कोर्ट ने यह फैसला सरकार पर छोड़ दिया कि वह 30 दिसंबर के बाद इन बंद हुए नोटों को जारी रखने का निर्णय लेती है या नहीं. इससे पहले नोटबंदी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कई तीखे सवाल पूछे. कोर्ट ने पूछा कि करोड़ों रुपये के नए नोट रोजाना पकड़े जा रहे हैं, लेकिन आम आदमी को 24000 रुपये नहीं मिल पा रहे हैं.

कोर्ट ने कहा आपकी अधिसूचना में है कि लोग एक हफ्ते में 24000 रुपये निकाल सकेंगे, लेकिन यह नहीं मिल रहे हैं, जबकि आपकी अधिसूचना अब भी 24000 रुपये देने का वादा कर रही है. नोट पकड़े जाने की बात पर केंद्र सरकार ने जवाब दिया कि इस मामले में अनेक बैंक अधिकारी और मेनैजर शामिल हैं, जिन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अब तक 4 लाख करोड़ रुपये की नई नकदी बैंकों में जा चुकी है.

कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों, रेलवे टिकट और स्कूलों में तो पुराने नोटों को जारी रखा जा सकता है. लेकिन अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि ऐसा करने से सरकार को स्थिति का आकलन करने में परेशानी होगी और पुराने नोट जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर को भी आगे बढ़ाना होगा. यह अब संभव नहीं है. इन 14 दिनों में सरकार हालात का आकलन करेगी.

उन्होंने पट्रोल पंपों का उदाहरण दिया जहां पुरानों नोटों की धांधली हुई. उन्होंने कहा कि पंपों ने 10, 50 और सौ-सौ के नोट लेने के बाद भी 500 और 1000 रुपये के नोट ही जमा किए और ये सब कमीशन लेकर हुआ. इसलिए पुराने नोटों को स्वीकार करने की सीमा और नहीं बढ़ाई जाएगी.

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