IGMC शिमला के डॉक्टरों ने बिना सर्जरी बंद किए दिल के तीन छेद

शिमला

आईजीएमसी में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डा. राजीव भारद्वाज के नेतृत्व वाली डॉक्टरों की टीम ने एक बहुत ही कठिन ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर इतिहास रचा है. हिमाचल में पहली बार किए गए इस आपरेशन को बिना किसी सर्जरी के कैथेटर आधारित तकनीक से किया गया.

कुल्लू की रहने वाली 10 महीने गीतांजलि के दिल में जन्म से ही तीन छेद थे. इसकी वजह से उसे लगातार छाती में दर्द व संक्रमण की शिकायत थी. लंबे समय से उसका एंटीबायोटिक से उपचार किया जा रहा था. इन्हीं दिक्कतों की वजह से उसका वजन भी नहीं बढ़ पा रहा था.

डॉ. राजीव भारद्वाज ने अक्टूबर महीने में इस बच्ची की ईको कार्डियोग्राफी की, जिसमें उसके दिल के छेदों का पता लगा. एक छेद आयोर्टा व पल्मनरी आरट्री के बीच था, जबकि दो अन्य छेद बाएं व दाएं एट्रियम के बीच, जिन्हें एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट्स के नाम से जाना जाता है। इन छेदों की वजह से उसका बाईं तरफ का रक्त हृदय के दाईं तरफ तेजी से बढ़ रहा था, जिसकी वजह से पल्मोनरी आरट्री में ज्यादा बहाव था.

अंदेशा जताया गया कि यदि इन छेदों को जल्द बंद नहीं किया गया तो इससे दबाव अत्याधिक बढ़ने से आपरेशन मुश्किल हो जाएगा. डॉ. भारद्वाज ने  नॉन सर्जिकल तरीके से इन छेदों को बंद करने का प्रयास किया और वो सफल हो गए.

Share With:
Rate This Article