नोटबंदी पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा-10-15 दिनों में समस्‍याएं होंगी खत्‍म

दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी के मामले में दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार से सवाल किए हैं. कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि एक व्यक्ति कितने पैसे बैंक से निकाल सकता है. वहीं सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठे हैं. अगले 10 से 15 दिनों में दिक्कतें दूर हो जाएंगीं. सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से पूछा है कि जब वह यह योजना बना रहे थे तो क्या वह गुप्त थी?

मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की पीठ ने नोटबंदी के मामले में सुनवाई के दौरान पूछा है कि एक व्यक्ति एक दिन में 24 हजार रुपये निकालने की लिमिट है. क्या कोई व्यक्ति इतनी रकम निकाल भी पा रहा है. इस पर कोर्ट ने सरकार से 14 दिसंबर तक जवाब देने के लिए कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से पूछा है कि नोटबंदी का फैसला RBI एक्ट 26 (2) का उल्लंघन है? इस एक्ट के मुताबिक केंद्रीय बोर्ड की मंजूरी से ही किसी सीरीज के नोटों को बंद करने का फैसला लिया जा सकता है. क्या नोटबंदी को लेकर 8 नवंबर को जो फैसला लिया गया और उसके बाद का नोटिफिकेशन असंवैधानिक है?

नोटबंदी का फैसला संविधान के अनुच्‍छेद 14 में दिए दिए समानता के अधिकार और व्यापार करने की आजादी से संबंधित अनुच्‍छेद 19 जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है? नोटबंदी के फैसला लेने से पहले कोई तैयारी नहीं की गई थी या फिर इसे लागू करने से पहले नए नोटों का सही इंतजाम नहीं गया था कि देशभर में कैश कैसे पहुंचाया जाएगा?

किसी भी व्यक्ति का बैंकों और एटीएम से पैसा निकालने की सीमा तय करना लोगों के अधिकारों का हनन है ? क्या किसी जिला सहकारी बैंकों में पुराने नोट जमा करने और नए रुपये निकालने पर रोक सही है?

केन्द्र से यह भी पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट में कोई राजनीतिक पार्टी जनहित याचिका दाखिल कर सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से ये भी पूछा है कि धन निकालने की न्यूनतम सीमा निर्धारित की गई है तो फिर लोग यह धन क्यों नहीं निकाल पा रहे हैं?

पीठ ने भावी सुनवाई के लिये विभिन्न विचारणीय कानूनी सवाल तैयार करने का प्रस्ताव रखा. इस पर रोहतगी ने नोटबंदी पर विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित मामलों पर रोक लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया. पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने 2 दिसंबर को केन्द्र से कहा था कि ग्रामीण इलाकों में नागरिकों की परेशानियों और असुविधा को कम करने के लिये अब तक किये गये उपायों की जानकारी दी जाए.

नोटबंदी के विभिन्न पहलुओं को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुये कोर्ट ने कहा था कि सभी पक्ष एक साथ मिलकर बैठें और मामलों को श्रेणीबद्ध करें जिन्हें हाईकोर्ट भेजा जा सकता है और जिनकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट कर सकती है.

अटार्नी जनरल ने कहा था कि सरकार को सहकारी बैंकों की स्थिति की जानकारी है जिनमें अधिसूचित बैंकों की तुलना में बुनियादी सुविधा और व्यवस्था का अभाव है. केन्द्र सरकार ने 24 नवंबर को नोटबंदी के मामले में न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल किया था और कहा था कि यह साहसी कदम आजादी के बाद से ही समानांतर अर्थव्यवस्था के रूप में गरीब और मध्यम वर्ग को प्रभावित कर रहा है और यह जमा और काला धन खत्म करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर को दूसरी बैंकों की तरह ही सहकारी बैंकों को भी कारोबार की अनुमति देने के लिये केरल की 14 सहाकारी बैंकों की याचिकाओं पर भी सुनवाई के लिये सहमत हो गया था.

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