नोटबंदी के बाद बैंकों के पास पहुंचे 3.4 फीसदी नकली नोट

बेंगलुरु

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की रात को जब 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद किए जाने का ऐलान किया था तो उसका मकसद ब्लैक मनी और फर्जी नोटों पर लगाम कसना था. यह फैसला सरकार ने नकली नोटों को बाजार से बाहर निकालने के लिए किया था, जिन्हें आतंकवादियों और अन्य अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है. 27 नवंबर तक केलव 9.63 करोड़ रुपये के 1.39 लाख पुराने नोट बैंकिंग सिस्टम में लौटे हैं। यह आंकड़ा बैंकों में जमा किए गए कुल नोटों का 3.4 पर्सेंट है.

नोटबंदी के बाद 20 दिनों का यह आंकड़ा है, 30 दिसंबर तक इसमें इजाफा हो सकता है. अभी तक वापस आए नोट सरकार की ओर से लगाए आंकड़े से खासा कम है. वर्ष 2016 की पहली छमाही में इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टिट्यूट ने अनुमान लगाया था कि मार्केट में 400 करोड़ रुपये के नकली नोट बाजार में हैं. इनमें 50 पर्सेंट हिस्सेदारी 1,000 रुपये के नकली नोटों की है, जबकि 25 पर्सेंट नोट 500 रुपये के हैं.

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