पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए नहीं थे पैसे, घंटों बैंक की लाइन में खड़ा रहा बुजुर्ग

पानीपत

नोटबंदी के बाद से पूरे देश में कैश की किल्लत साफ तौर पर देखी जा सकती है. आम लोगों को  घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता है. लेकिन तब क्या हो जब नोटबंदी के चलते किसी की अंतिम यात्रा ही रुक जाए. कुछ ऐसा ही वाक्या देखने को मिला हरियाणा के पानीपत में.

नोटबंदी की वजह से एक बुजर्ग अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार नहीं कर सका, घंटों बैंक की लाइन में खड़े होन के बावजूद भी उन्हें पैसे नहीं मिले. हालांकि, मीडिया के मामले में दखल देने के बाद बुजर्ग को बैंक ने अंदर बुलाया और उन्हें पैसे दिए, जिसके बाद उनकी पत्नी का अंतिम संस्कार हो सका.

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दरअसल, पानीपत के रहने वाले एक बुजर्ग की पत्नी चन्द्रकला का बीमारी के चलते निधन हो गया. घर में मौत होने के बावजूद बुजर्ग शहर के ही बैंक की लाइन में पैसे निकलवाने के लिए खड़े रहे. लाइन में लगे रहने के बावजूद पांच घंटे बीत जाने पर भी उन्हें पैसा नहीं मिला. इसके चलते उन्होनें वंहा कवरेज करने आई मीडिया से गुहार लगाई मीडिया के कैमरों की वजह से बुजर्ग को अंदर बुलाया गया और उन्हें पैसे दिए.

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बुजर्ग का कहना था कि उनके खाते में महज पांच हजार रुपए जमा है और उन्हें निकालने के लिए वो घंटो लाइने में लगे क्योंकि पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं.

हालांकि, नोटंबदी के बावजूद लोगों का धैर्य बना हुआ है, लेकिन कई बार जरुरत की कई चीजों के सामने धैर्य जवाब दे रहा है. उम्मीद है सरकार जल्द ही इस परेशानी का हल ढूंढ लेगी.

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