आतंकवाद के मुद्दे पर ‘हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन’ में पाक को घेरने की तैयारी

दिल्ली

विदेश मामलों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अजीज अमृतसर में आयोजित होने वाले ‘हार्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन में भाग लेने के लिए रविवार को भारत जाएंगे. ‘डॉन न्यूज’ ने बताया कि अमृतसर में इस सप्ताहांत (तीन एवं चार दिसंबर) दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है और अजीज रविवार (4 दिसंबर) को अमृतसर जाएंगे.

अजीज इस सम्मेलन में पाकिस्तानी प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व करेंगे. इस बैठक में अफगानिस्तान एवं उसके पड़ोसियों के बीच क्षेत्रीय सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि कनेक्टिविटी बढ़ाई जा सके और सुरक्षा खतरों से निपटा जा सके.

रिपोर्ट में कहा गया है कि सम्मेलन के इतर भारतीय अधिकारियों के साथ कोई बैठक नहीं होगी. एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है, ‘फिलहाल हमें उनकी ओर से कोई इच्छा दिखाई नहीं देती… गेंद भारत के पाले में है। वे जानते हैं कि हम इच्छुक हैं लेकिन हमें नहीं पता कि वे इच्छुक हैं या नहीं.’

पाकिस्तान और भारत ने इससे पहले ‘हार्ट ऑफ एशिया’ मंत्रिस्तीय बैठक में इस्लामाबाद में बैठक की थी और ‘समग्र द्विपक्षीय वार्ता’ शुरू करने पर सहमति जताई थी जिसके तहत मतभेद के सभी मामलों पर चर्चा की जानी थी लेकिन इस साल जनवरी में पठानकोट आतंकवादी हमले के कारण वार्ता शुरू नहीं हो सकी.

एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तान ने अमृतसर में द्विपक्षीय वार्ता की बात भारत से औपचारिक रूप से नहीं की है. भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने ‘बीबीसी उर्दू’ की ‘फेसबुक लाइव’ परिचर्चा में भाग लेते हुए बुधवार को कहा था कि यदि भारत तैयार है तो पाकिस्तान बिना शर्त वार्ता शुरू करने के लिए तैयार है.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ‘हार्ट ऑफ एशिया’ मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग नहीं लेंगी. समाचार पत्र ने एक पाकिस्तानी दूत के हवाले से कहा, ‘सुषमा स्वराज भाग नहीं ले रही हैं, ऐसे में किसी अन्य के साथ बैठक करना मुश्किल है।’ समाचार पत्र में कहा गया है, ‘पाकिस्तानी पक्ष का मानना है कि संबंधों में मौजूदा गतिरोध को दूर करने के लिए भारत को अपना हठ छोड़ना होगा.’

अधिकारी ने कहा, ‘भारत को अपना मन बनाना होगा. वे कश्मीर पर बातचीत करने के लिए तैयार नहीं हैं.’ भारत ने अजीज के साथ द्विपक्षीय वार्ता को लेकर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है लेकिन उसने यह स्पष्ट किया है कि ‘वार्ता और आंतकवाद एक साथ नहीं चल सकते.’

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