पंजाब की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस की एंट्री, जगमीत बराड़ को सौंपी कमान

पंजाब की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस की एंट्री, जगमीत बराड़ को सौंपी कमान

चंडीगढ़

पंजाब की राजनीति में हाशिये पर चल रहे कांग्रेस से निष्कासित पूर्व सांसद जगमीत बराड़ को अंतत: अपनी नई राजनीतिक जमीन मिल गई है. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने उन्हें पंजाब में पार्टी अध्यक्ष बनाया है. इसके साथ ही टीएमसी की पंजाब में एंट्री का रास्ता भी खुल गया है. पंजाब विधानसभा चुनाव में टीएमसी और आम आदमी पार्टी का गठबंधन होने की पूरी-पूरी संभावना है, क्योंकि इन दिनों अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी एक ही मंच पर खड़े नजर आते हैं.

टीएमसी ने भले ही बराड़ को नवंबर में प्रदेश प्रधान बनाया हो, लेकिन इसकी भूमिका चार माह पूर्व से ही बननी शुरू हो गई थी. अप्रैल में कांग्रेस से निष्कासित होने के बाद बराड़ लगातार आप में जाने को लेकर प्रयासरत रहे. उनकी आप संयोजक केजरीवाल से बैठकें भी हुई, लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ सकी. अंतत: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व टीएमसी की अध्यक्ष ममता बनर्जी के हस्तक्षेप के बाद आप ने बराड़ द्वारा चलाए जाने वाले लोकहित अभियान के साथ समझौता तो किया, लेकिन आप ने संविधान का हवाला देते हुए बाहर से सपोर्ट देने की बात कही.

जगमीत बराड़ कहते हैं, ‘आप के साथ लोकहित अभियान का जो समझौता हुआ था वह खत्म, अब आगे की बातचीत दोनों ही पार्टी के हाईकमान करेंगे.’

जगमीत बराड़ कांग्रेस की टिकट पर दो बार सांसद और कांग्रेस वर्किग कमेटी के सदस्य रहे. लोकसभा चुनाव में हार के बाद सोनिया गांधी को हटाकर पार्टी की कमान किसी अन्य को सौंपने का मुद्दा उठाया. इस पर पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निलंबित कर दिया. एक साल बाद अंतत: सोनिया गांधी के कहने पर उनका निष्कासन खत्म किया गया. आप के प्रति लगातार बढ़ते प्रेम व कैप्टन अमरिंदर सिंह के विरुद्ध की जा रही लगातार बयानबाजी को देखते हुए पार्टी ने उन्हें अप्रैल में निष्कासित कर दिया.

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