शिमलाः IAS प्रमोशन का 2002 से होगा रिव्यू, बैचवाइज होगा लाभ

शिमला

प्रदेश में HAS से IAS प्रमोट हुए अफसरों का रिव्यू होने जा रहा है. विवाद और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राज्य सरकार प्रमोशन का रिव्यू करने जा रही है. कार्मिक विभाग ने इस मामले की फाइल तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दी है.

CM ऑफिस से मंजूरी मिलने के बाद रिव्यू की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. सरकार के इस फैसले से वर्ष-2002 के बाद HAS से IAS में इंडक्ट हुए अधिकारियों का बैच रिव्यू हो सकता है. इसमें एक्स सर्विस मैन कोटे के तहत पदोन्नत हुए उन अधिकारियों का बैच नीचे आएगा, जिनके पास डी-मोबलाइज्ड आर्म्ड फोर्सिस का कोटा नहीं है.

हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के मुताबिक IAS  अधिकारी मोहन चौहान पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा. सूत्र बताते हैं कि इसमें 2002 से लेकर अभी तक पदोन्नत हुए अधिकारियों का बैच प्रभावित होगा.

एक्स सर्विसमैन कोटे के तहत पदोन्नत हुए अधिकारियों का बैच आगे खिसक सकता है, वहीं सामान्य प्रक्रिया में पदोन्नत होकर IAS  बने अधिकारियों को एक बैच का फायदा हो सकता है. इसमें सबसे पहले 2002 में पदोन्नत हुए अधिकारियों को लाभ की उम्मीद है.

इसमें डा. सुनील कुमार चौधरी, अक्षय सूद, जीके श्रीवास्तव और जेआर कटवाल शामिल है. इसके बाद 2003 बैच के डा. अजय कुमार शर्मा, 2004 बैच के बीर सिंह ठाकुर, राकेश कुमार शर्मा, विकास लाबरू, 2005 के राजीव शर्मा, अमिताभ अवस्थी, 2006 बैच के डा. एएस गुलेरिया, राकेश कंवर, डीडी शर्मा है.

2008 बैच के हंसराज चौहान, राजेश शर्मा, राखिल काहलो, संजीव भटनागर, संजीव पठानिया, हिमांशु शेखर चौधरी, एनके लट्ठ के अलावा 2009 के गोपाल शर्मा, डा. आरके पूर्थि, विनोद कुमार, 2010 बैच के सीपी वर्मा, संदीप कुमार अमरजीत सिंह शामिल है.

इसी दौरान HAS की सेवाओं में कैप्टन जैएम पठानिया भी पदोन्नत हुए है. इस पदोन्नति प्रकिया में आयु सीमा की शर्त होने के कारण HAS अधिकारी एमपी सूद, रामेश्वर शर्मा IAS  में नहीं सके थे. इनकी इसी साल रिटायरमेंट हो गई है.

हालांकि इससे पहले इंडक्शन के लिए आयु सीमा को भी फैसला आया है. इससे पहले HAS अधिकारी अशोक शर्मा भी आयु सीमा की शर्त के चलते पदोन्नत नहीं हो सके थे. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले इन सेवानिवृत्त अधिकारियों को उम्मीद बंधी है कि यदि राज्य सरकार की ओर से इस पूरे समय की पदोन्नति को रिव्यू किया जाता है तो इन्हें राहत मिल सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद विधि विभाग की सलाह के बाद इस मामले की फाइल तैयार कर सरकार के पास मंजूरी के लिए भेज दी है. सरकार की मंजूरी के बाद ही इस पर कार्यवाही हो सकेगी.

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