ऊनाः सरकारी दावों की खुल रही पोल, सैंकड़ो परिवार बिना शौचालय के

ऊनाः सरकारी दावों की खुल रही पोल, सैंकड़ो परिवार बिना शौचालय के

ऊना

भले ही हिमाचल को ओडीएफ स्टेट का दर्जा मिल गया है, मगर जिला ऊना में खुले से शौच मुक्त होने के दावों की धरातल पर पोल खुल रही है. हालांकि ODF दर्जा ग्रामीण इलाकों के लिए मिला है, लेकिन शहरों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है.

ऊना जिले के शहरों से लेकर गांव में सैकड़ों घरों में टायलेट नहीं है. नगर परिषद ऊना व संतोषगढ़, नगर पंचायतों मैहतपुर बसदेहड़ा, टाहलीवाल, गगरेट और दौलतपुर चौक में कई लोग अभी भी खुले में शौच जा रहे हैं.

ऊना नगर परिषद की बात करें तो यहां 102 परिवारों के पास टॉयलेट नहीं है. इस नप के कुल 11 वार्ड हैं, कोई भी वार्ड अभी खुले से शौचमुक्त नहीं हो पाया है. जिन परिवारों के पास टॉयलेट नहीं है, वह खुले में ही शौच जा रहे हैं.

इन 102 परिवारों ने नगर परिषद के पास टॉयलेट निर्माण के लिए आवेदन किया है. इनमें से 40 ने ही टॉयलेट बनाने का काम शुरू किया है, लेकिन ये अभी कंपलीट नहीं हो पाए हैं. ऐसी ही स्थिति संतोषगढ़ नप की है, जहां अभी तक 200 परिवारों के पास अपना टॉयलेट नहीं है.

इन परिवारों के लोग भी खुले में शौच जा रहे हैं. नगर परिषद ने टॉयलेट निर्माण के 23 आवदेन मंजूर किए हैं. इनमें से अभी चार ने ही टॉयलेट निर्मित किए हैं. जबकि 19 ने अभी टॉयलेट नहीं बनाया है. इन्हें नगर परिषद द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं.

हालांकि प्रशासन ने जिला को खुले से शौचमुक्त रखने के लिए विशेष अभियान भी चलाया था. टॉयलेट निर्माण न होने की सूरत में बिजली और पेयजल कनेक्शन काटने की चेतावनी भी दी गई, लेकिन इस मुहिम का शहरी निकाय क्षेत्र में ज्यादा असर नहीं दिखा.

मैहतपुर बसदेहड़ा नगर पंचायत भी खुले से शौचमुक्त नहीं हो पाई है. यहां 50 परिवारों ने टॉयलेट निर्मित नहीं किए हैं. जो खुले में ही शौच जा रहे हैं. इन्हें नगर पंचायत द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं. इसके अलावा 40 लोगों ने नगर पंचायत के पास टॉयलेट निर्माण के लिए आवेदन कर रखा है.

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