जजों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच तनातनी जारी

जजों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच तनातनी जारी

दिल्ली

हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच तकरार और बढ़ गई है. कोर्ट ने केंद्र को हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए 43 की नियुक्ति के आदेश दिए और कहा कि तीन हफ्ते में केंद्र नियुक्ति दे.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की इन लोगों की नियुक्ति पर विचार करने की दलील खारिज कर दी है. केंद्र ने इस सूची को वापस भेजा था पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि नए जजों की नियुक्ति की कोई फाइल सरकार के पास नहीं है.

77 सिफारिशों में से 34 जजों की नियुक्तियां कर दी गई हैं जबकि 43 सिफारिशों को दोबारा देखने के लिए कोलेजियम को भेजा गया है. चीफ जस्टिस ठाकुर ने कहा था कि वह केंद्र की भेजी फाइलों को देखेंगे. 15 नवंबर को कोलेजियम की मीटिंग है और जजों की नियुक्तियों के लिए MOP को भी फाइनल किया जाएगा.

पहले हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और दो वरिष्ठ जजों का कोलेजियम संभावितों के नाम की सूची केंद्रीय कानून मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस को भेजते हैं. कानून मंत्रालय इस सूची को राज्य सरकार और IB को छानबीन के लिए भेजता है, रिपोर्ट आने पर ये फाइलें और कानून मंत्रालय की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस और दो वरिष्ठ जजों के कोलेजियम को भेजी जाती हैं.

इसमें किसी संभावित के खिलाफ आई रिपोर्ट भी लगाई जाती हैं और कोलेजियम को विचार के लिए कहा जाता है. सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम इस पर विचार कर कानून मंत्री को ये लिस्ट भेजता है.    इसके बाद कानून मंत्रालय एक बार फिर से विचार करने को कह सकता है.

लेकिन कोलेजियम की सिफारिशों को मानना होगा और कानून मंत्रालय सूची को प्रधानमंत्री कार्यालय भेजता है. वहां से नियुक्ति की फाइल राष्ट्रपति के पास भेजी जाती है. राष्ट्रपति के साइन होते ही नियुक्ति हो जाती है.

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