SC ने Google-Yahoo-Microsoft से कहा- 36 घंटे के अंदर Delete करें लिंग परीक्षण संबंधी विज्ञापनों

SC ने Google-Yahoo-Microsoft से कहा- 36 घंटे के अंदर Delete करें लिंग परीक्षण संबंधी विज्ञापनों

दिल्ली

गर्भ में बच्चे के लिंग जांच के तरीकों की जानकारी इंटरनेट पर मौजूद होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने रुख और सख्त कर लिया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को ऐसी सामग्री पर कार्रवाई के लिए नोडल एजेंसी बनाने को कहा है. इस एजेंसी के पास लोग ऐसी सामग्री की शिकायत कर सकेंगे. शिकायत मिलने के 36 घंटे के भीतर सर्च इंजन से सामग्री हटाई जाएगी.

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट Google, Microsoft और Yahoo जैसे सर्च इंजन से ऐसे विज्ञापन हटाने का आदेश दे चुका है. कोर्ट ने इस तरह के सर्च को ब्लॉक करने को भी कहा था. सुप्रीम कोर्ट में साबू मैथ्यू जार्ज नाम के शख्स ने याचिका दाखिल कर सर्च इंजन में गर्भ में शिशु के लिंग जांच से जुड़े विज्ञापनों का मसला उठाया था. इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और याहू के साथ बैठक कर मामले का हल निकालने को कहा था.

सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद कंपनियों ने ऐसे विज्ञापन हटाने की बात कही थी. साथ ही उन्होंने कहा था कि वो 43 ऐसे की-वर्ड को ब्लॉक लिस्ट में डालने को तैयार हैं, जिनके ज़रिए ऐसी जानकारी लोगों तक पहुंच सकती है.

आज याचिकाकर्ता के वकील संजय पारीख ने कोर्ट को बताया कि अब भी ऐसी जानकारी सर्च इंजन पर मौजूद हैं. गूगल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कंपनी ने काफी सामग्री ब्लॉक की है. जितनी सख्ती की मांग याचिकाकर्ता कर रहे हैं वो व्यवहारिक नहीं है. जानकारी लेना लोगों का संवैधानिक हक है. इस पर बहुत ज़्यादा पाबंदी नहीं लगाई जानी चाहिए. इससे सर्च इंजन का व्यापार भी प्रभावित होता है.

दो जजों की बेंच के अध्यक्ष जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, “देश में लिंग अनुपात चिंताजनक है. इसे बेहतर बनाने के लिए कड़े कदम उठाने की ज़रूरत है. ये बात आपके पैसे कमाने से ज़्यादा महत्वपूर्ण है.”

सुप्रीम कोर्ट ने आज अंतरिम आदेश देते हुए केंद्र को जल्द से जल्द इस मसले पर एक नोडल एजेंसी का गठन करने को कहा. कोर्ट ने कहा कि सरकार इस एजेंसी और इसके काम की जानकारी लोगों तक पहुंचाए. मामले की अंतिम सुनवाई 17 फरवरी 2016 को होगी.

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