हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को 1 लाख 34 हजार करोड़ रुपए का बिल भेजेगी पंजाब सरकार

हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को 1 लाख 34 हजार करोड़ रुपए का बिल भेजेगी पंजाब सरकार

चंडीगढ़

पंजाब विधानसभा में बुधवार को बुलाए गए विशेष सत्र में राज्य सरकार ने अहम फैसला लिया है. एसवाईएल मुद्दे को लेकर बुलाए गए एक दिन के विशेष सत्र में सरकार ने रॉयल्टी बिल पास करते हुए फैसला लिया है कि 1 नवंबर 1966 से गैर रिपेरियन राज्य हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को दिए नदी के पानी की कीमत वसूल की जाएगी. कीमत वसूलने के लिए पंजाब सरकार इन राज्यों को 1 लाख 34 हजार करोड़ रुपए का बिल भी भेजेगी.

पंजाब सरकार ने विधानसभा में कहा कि हरियाणा और राजस्थान को 1 नवंबर 1966 से दिए गए पानी के लिए रॉयल्टी ली जाएगी. इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया. इस कदम से जल विवाद के और गरमाने की आशंका है.

इस दौरान पंजाब विधानसभा में 66 विधायक मौजूद रहे. विधानसभा में भाजपा और अकाली दल के अलावा परगट सिंह और आजाद विधायक बैंस बंधु भी उपस्थित थे. सुबह 10 बजे शुरू हुई विधानसभा की कार्यवाही पिछले दिनों में दिवंगत हुए नेताओं व अन्य प्रमुख लोगों को श्रद्धांजलि देने के बाद आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई थी. दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विधानसभा में गैर रिपेरियन राज्य को दिए जा रहे पानी पर रॉयल्टी लेने को लेकर प्रस्ताव पेश किया गया.

संसदीय मामलों के मंत्री मदन मोहन मित्तल ने सदन में कहा की 1 नंवबर 1966 नॉन रिपेरियन राज्य हरियाणा और राजस्थान को जो पानी गया उस पर रॉयल्टी वसूली की जाएगी. राजस्थान को आठ मिलियन फीट पानी जा रहा है.

उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने कहा कि जो प्रस्ताव लाया गया है वह एक निर्देश है कि हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को रॉयल्टी और कॉस्ट के बिल भेजे जाएं. मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने प्रस्ताव पेश किया कि मुलाजिम और अधिकारी एसवाइएल के लिए किसी एजेंसी को जमीन न सौंपे. इस बारे में विधानसभा निर्देश जारी करे. इस प्रस्ताव को भी सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया.

कैबिनेट की बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने बताया था कि इससे अधिग्रहीत जमीन को पंजाब सरकार के कब्जे से मुक्त कर जमीन के असली मालिकों, उनके आश्रितों या उनके कानूनी वारिसों को मुफ्त में सौंपा जा सकेगा. इस संबंधी जरूरी आदेश जल्द जारी हो रहे हैं. गौरतलब है कि इससे पहले भी पंजाब सरकार 14 मार्च, 2016 को एसवाइएल की अधिग्रहीत जमीन उसके असली मालिकों को लौटाने का बिल पारित कर चुकी है.

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