45 साल से मना रही थी शहीद की बरसी, अब लगा पता पाकिस्तान की जेल में है बंद

45 साल से मना रही थी शहीद की बरसी, अब लगा पता पाकिस्तान की जेल में है बंद

अमृतसर

1971 की जंग में हवलदार धर्मपाल सिंह को शहीद करार दिया गया कुछ साल बाद उनकी पत्नी पाल कौर की धर्मपाल के भाई से शादी करा दी गई एक बेटा भी हुआ- टोनी, लेकिन 10 मई 2016 को अखबार की एक खबर ने 72 साला पाल कौर की जिंदगी में एक नया तूफान खड़ा कर दिया उन्हें पता चला कि पति धर्मपाल सिंह शहीद नहीं हुए थे, बल्कि पाकिस्तान की जेल में कैद हैं.

खबर में फिरोजपुर के सतीश कुमार मरवाहा के हवाले से बताया गया था कि धर्मपाल जिंदा हैं और किला अटक जेल में कैद हैं। सतीश खुद 1986 में इस जेल से छूटकर आए थे जब सरबजीत सिंह का मामला चर्चा में था तब एक पंजाबी अखबार का रिपोर्टर सतीश तक पहुंचा था.

लेकिन धर्मपाल की खबर उनकी बीवी तक पहुंचते-पहुंचते 2016 आ गया पाल कौर पिछले 45 साल से धर्मपाल को शहीद मानकर उनकी बरसी मनाती आ रही हैं, पाल कौर कहती हैं- इतने साल बाद जिस दिन यह खबर सुनी, उस सारी रात मुझे नींद नहीं आई बस यही सोचती रही कि कब सवेरा हो और उड़कर फिरोजपुर चली जाऊं और सतीश कुमार से उनके बारे में पूछूं।
हम सुबह ही सतीश कुमार के पास पहुंच गए उन्हें पति की फोटो दिखाई तो कुछ देर निहारते रहे, फिर पहचान लिया सतीश ने बताया कि 1974 से 1976 तक उनके साथ ही जेल में थे।
हमने उनसे निशानियां पूछीं तो सतीश ने बताया- धर्मपाल की दाईं आंख पर निशान है.

वह अक्सर गाते थे- लै जा छलियां, भुना लईं दाणे। इतना सुनते ही मेरा तो रोना ही बंद नहीं हुआ यही तो वह गाना था जो धर्मपाल अकसर गुनगुनाते थे पाल कौर कहती हैं- पति की शहादत की खबर देने घर में दो फौजी आए थे, लेकिन उन्होंने न तो शव दिया, न ही उनका कोई सामान.

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