जानिए चार दिन के पर्व छठ में क्‍या है हर एक दिन का महत्‍व...

जानिए चार दिन के पर्व छठ में क्‍या है हर एक दिन का महत्‍व…

लोक आस्था का महापर्व छठ का आरंभ शुक्रवार से हुआ. कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक चलने वाला यह चार दिन का पर्व खाए नहाय के साथ ही शुरू हो गया है. तड़के महिलाएं नदियों और तालाबों के तट पर जुट जाती हैं.

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इस साल छठ 4 नवंबर को नहाय खाए से शुरु हुआ. आज यानी 5 नवंबर को खरना मनाया गया. कल रविवार को शाम का अर्घ्य दिया जाएगा और 7 नवंबर को सुबह का अर्घ्य देने के बाद अरुणोदय में सूर्य छठ व्रत का समापन किया जाएगा. आईए जानते हैं इस चार दिन के पर्व के हर दिन के महत्‍व के बारे में…

पहला दिन: नहाय खाए
नहाय खाए, छठ पूजा व्रत का पहला दिन. इस दिन नहाने खाने की विधि की जाती है. इस दिन स्‍वयं और आसपास के माहौल को साफ सुथरा किया जाता है. लोग अपने घर की सफाई करते हैं और मन को तामसिक भोजन से दूर कर पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी भोजन ही लेते हैं.

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दूसरा दिन: खरना
खरना, छठ पूजा का दूसरा दिन होता है. इस दिन खरना की विधि की जाती है. खरना का मतलब है पूरे दिन का उपवास. व्रती व्‍यक्ति इस दिन जल की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करता. शाम होने पर गन्ने का जूस या गुड़ के चावल या गुड़ की खीर का प्रसाद बना कर बांटा जाता है.

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तीसरा दिन: शाम का अर्घ्य
इस दिन शाम का अर्घ्य दिया जाता है. सूर्य षष्ठी को छठ पूजा का तीसरा दिन होता है. आज पूरे दिन के उपवास के बाद शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. मान्‍यता के अनुसार शाम का अर्घ्य के बाद रात में छठी माता के गीत गाए जाते हैं और व्रत कथा भी सुनी जाती है.

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चौथा दिनः सुबह का अर्घ्य
छठ पर्व के चौथे और अंतिम दिन सुबह का अर्घ्य दिया जाता है. आज के दिन सुबह सूर्य निकलने से पहले ही घाट पर पहुंचना होता है और उगते सूर्य को अर्घ्य देना होता है. अर्घ्य देने के बाद घाट पर छठ माता से संतान-रक्षा और घर परिवार के सुख शांति का वर मांगा जाता है. इस पूजन के बाद सभी में प्रसाद बांट कर फिर व्रती खुद भी प्रसाद खाकर व्रत खोल लेते हैं…

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