पाक की खुफिया एजेंसी ISI के इशारों पर घाटी में जलाए जा रहे हैं स्कूल

पाक की खुफिया एजेंसी ISI के इशारों पर घाटी में जलाए जा रहे हैं स्कूल

दिल्ली

कश्मीर घाटी में सिलसिलेवार तरीके से स्कूलों में आग लगा कर उन्हें नेस्तनाबूद करना एक और उदाहरण है कि किस तरह से यहां के अलगाववादी संगठन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के हाथों की कठपुतली बन चुके हैं। दरअसल, पिछले तीन महीने से कश्मीर में जन जीवन को अस्त व्यस्त करने के बाद स्कूलों को आग लगाना पाकिस्तान की इस बदनाम खुफिया एजेंसी का अगला कदम है.

आइएसआइ के इशारे पर नाचने वाले अलगाववादी कश्मीर में स्कूलों को जला कर वहां अनपढ़ युवाओं की फौज तैयार करना चाहते हैं जो आगे चल कर उनके भारत विरोधी अभियान को आगे बढ़ा सके.

खुफिया एजेंसियों को घाटी में स्कूलों को जलाने की घटना को लेकर कुछ गुप्त सूचनाएं काफी पहले मिली थी. इस बारे में राज्य सरकार की संबंधित एजेंसियों को सूचना भी दी गई थी कि सरकारी भवनों और खास तौर पर स्कूलों को आग के हवाले देने की घटना सामने आएगी.

इसका निर्देश आइएसआइ की तरफ से सीधा आया है. सूत्रों के मुताबिक आइएसआइ इस साजिश के जरिए दो तरह से फायदे उठाने की फिराक में है. पहला फायदा तो यह होगा कि कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह हासिल होगा.

लेकिन दूसरा सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कश्मीर में शिक्षा व्यवस्था और पंगु होगी और अशिक्षित युवाओं की फौज से उन्हें अपने लिए आतंकी तैयार करने में आसानी होगी. खुफिया एजेंसियों को इस बात की सूचना मिली है कि जिस तरह से कश्मीरी छात्रों को वजीफा देने, उन्हें स्किल इंडिया के तहत रोजगार देने या भारतीय सैन्य बलों में उन्हें शामिल करने का सरकारी अभियान चल रहा है उससे घाटी में रहने वाले अलगाववादी और सीमा पार उनके आका भी काफी परेशान हैं.

सूत्र बताते हैं कि स्थानीय युवाओं को पाकिस्तानी एजेंसियों की तरफ से आतंकी गिरोह में शामिल होने के लिए मिलने वाले पैसे को दोगुना कर दिया गया है फिर भी कोई तैयार नहीं हो रहा. अभी कश्मीर घाटी में अब स्थानीय तौर पर सिर्फ 150 के करीब आतंकी बचे हैं. एक समय घाटी में स्थानीय आतंकियों की संख्या हजारों में थी.

इसके अलावा 2500 के करीब ऐसे लोगों का समूह है जो अलगाववादियों के हर कदम का समर्थन करते हैं. बाकी आबादी डर से इनके कहने के मुताबिक काम करती है.

जम्मू व कश्मीर के पूर्व निदेशक (शिक्षा) शाह फैजल का मानना है कि वैसे लोग जो घाटी में सामान्य स्थिति को लौटते हुए नहीं देखना चाहते वे लोग ही स्कूलों के आगजनी की घटना के पीछे है.

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