विकास की एक अनूठी गाथा, जानिए हरियाणा के 50 वर्षों का प्रभावशाली इतिहास

विकास की एक अनूठी गाथा, जानिए हरियाणा के 50 वर्षों का प्रभावशाली इतिहास

दिल्ली

एक नवंबर का दिन हर हरियाणावासी के लिए खास है. साल 1966 में इसी दिन हरियाणा अस्तित्व में आया. आजादी के बाद सालों तक भाषा के आधार पर भेदभाव का दंश सहने के बाद आखिरकार हरियाणा एक नवबंर 1966 को पंजाब से अलग हुआ.

हालात उस वक्त हरियाणा के अनुकूल नहीं थे, ना शिक्षा का विस्तार था, ना उद्योगों का नामो-निशाना, ना आधारभूत ढांचा और ना ढांचागत विकास की कोई योजना. लेकिन हरियाणा के पास जो दौलत थी, वो थी यहां के मेहनतकश लोग और उनका हौंसला. लोगों की अथक मेहनत के हौंसले के दम पर 50 सालों के इतिहास में हरियाणा ने कई इतिहास रच दिए.

बात चाहे कृषि की हो या उद्योगों की हरियाणा हर क्षेत्र में आगे बढ़ा और आज 50 साल का हरियाणा देश के सबसे विकसित राज्यों की सूची में अपना स्थान रखता है. सियासत के लिहाज से भी महज 10 लोकसभा सीटों वाला हरियाणा देश में अपनी अलग पहचान रखता है.

ऐसा कहा जाता है कि हरियाणा का जागरुक मतदाता देश की सियासत की दिशा तय करता है. हरियाणा की प्रादेशिक सियासत पर नजर ड़ालें तो ये भी कम उतार-चढ़ाव वाला नहीं रहा है. हरियाणा के पहले सीएम भगवत दयाल शर्मा के बाद से ही दशकों तक हरियाणा में जो आयाराम-गयाराम की राजनीति चली. उसने देश के हर राजनीतिक विश्लेषक का ध्यान हरियाणा की ओर खींचा.

विकास पुरुष के नाम से मशहूर रहे बंसीलाल ने जहां हरियाणा को विकास के लिए नींव देने का काम किया. तो देवीलाल और भजनलाल ने भी हरियाणा की अगुवाई करते हुए इसे आगे बढ़ाया. अब राज्य की राजनीति चौटाला और हुड्डा से होती हुई मनोहर लाल तक पहुंच चुकी है. और आयराम-गयाराम की राजनीति को भी हरियाणा ने आया गया कर सत्ता और सियासत को स्थिरता दे दी है.

सियासत से अलग अगर संस्कृति और सभ्यता के बात करें, तो भी हरियाणा का कोई सानी नहीं है. हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान बेहद अनूठी है. बात चाहे बोली की हो, या फिर गीत संगीत की, हरियाणा हर लिहाज से निराला है. हरियाणावी लोक नृत्य और लोक गायन ने आज भी अपनी पहचान को जिंदा रखा है. वाकई हरियाणा का आम आदमी समझता है कि उसका असली वजूद आज भी सभ्यता और संस्कृति से ही है.

विकास के पैमाने पर भी हरियाणा किसी से पीछे नहीं है. बात कृषि उत्पादन की करें या औद्योगिक उत्पादन की, हरियाणा ने पिछले पांच दशकों में मिसाल कायम किया है. कृषि और औद्योगिक उत्पादन के साथ देश के विकास में अहम योगदान दिया.

बात हरियाणा की हो और खेलों की ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता. हरियाणा के खिलाड़ियों ने हमेशा देश नाम रोशन किया है. इस साल हुए ओलंपिक खेलों में भी साक्षी मलिक ने पदक जीतकर साबित कर दिया की हरियाणा के खिलाड़ी देश की शान है. हरियाणा के खिलाड़ी हमेशा ही एक मिसाल बनकर उभरे हैं. कुश्ती और बॉक्सिंग जैसे खेलों में तो मानो हरियाणा के खिलाड़ी हर किसी पर भारी हैं.

वाकई हरियाणा का पिछले सालों का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है और गौरवशाली के इतिहास के साथ-साथ हर कोई हरियाणा के सुनहरे भविष्य की भी कामना कर रहा है, ताकि हरियाणा यूं ही विकास के पथ पर आगे बढ़ता रहे और देश के विकास में योगदान देता रहे.

रिपोर्ट- दीपक कौशिक

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