परिजन DNA रिपोर्ट दिखाते रहे और मांगते रहे मन्नतें, डॉक्टर करते रहे इग्नोर

परिजन DNA रिपोर्ट दिखाते रहे और मांगते रहे मन्नतें, डॉक्टर करते रहे इग्नोर

शिमला

कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) में बच्चा बदलने के मामले में अस्पताल प्रशासन ने बड़ी लापरवाही बरती है. अस्पताल में बच्चा बदला गया है, इसके बारे में एक माह बाद ही मंडी के दंपति की ओर से करवाए डीएनए में पता चल गया था.

मगर अस्पताल प्रशासन ने इस डीएनए रिपोर्ट को पूरी तरह से इग्नोर कर दिया. परिजन अस्पताल प्रशासन को डीएनए रिपोर्ट दिखाकर मन्नतें मांगते रहे कि उनका बच्चा बदला गया है. मामले को गंभीरता से लेकर उनका बच्चा उन्हें वापस किया जाए.

लेकिन अस्पताल प्रशासन पूरे मामले को हल्के में लेकर दंपति को पांच तक इधर से उधर दौड़ाए रखा. ये कहना है मंडी के दंपत्ति अनिल और उसकी पत्नी शीतल का. पहले नर्स ने कहा बेटा हुआ है, फिर बाद में दे दी बेटी.

अनिल ने बताया कि 26 मई को अस्पताल में उनकी डिलिवरी हुई. नर्स ने उन्हें बताया कि बेटा हुआ है, लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें बेटी सौंपी गई. ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को बताया कि पहले उन्हें बेटे होने की बात कही गई.

लेकिन स्टाफ ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. मन में शंका थी, इसी के चलते उन्होंने 13 जून डीएनए टेस्ट प्राइवेट लैब में करवाया. बेटी का डीएनए मैच नहीं हुआ. 27 जून को ये रिपोर्ट आई. उन्होंने अस्पताल के एमएस को शिकायत दी.

शिकायत में उन्होंने कहा कि उनकी बेटी का डीएनए मैच नहीं हुआ है. उन्होंने बच्चा बदलने की आशंका जताते हुए इसकी जांच की मांग की. अनिल ने कहा कि उन्हें जांच का आश्वासन दिया गया. 14 जुलाई को पुलिस अधीक्षक से मिलकर जांच की मांग की.

15 जुलाई को इस केस को लेकर छोटा शिमला थाने में शिकायत दर्ज की गई. पुलिस को अस्पताल प्रशासन ने कहा कि वे खुद इस मामले में डीएनए टेस्ट करवाएंगे. 15 जुलाई को अनिल ने इस मामले में दोबारा डीएनए टेस्ट करवाया.

इसकी रिपोर्ट 2 अगस्त को रिपोर्ट आई. इस बार फिर डीएनए मैच नहीं हुआ. इस रिपोर्ट को लेकर वे दोबारा अस्पताल ले लेकिन कुछ भी सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने इस मामले को कोर्ट में चुनौती दी.

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