रियासत काल से यहां लग रहा है मेला, दंगल में पहलवान दिखाते हैं टैलेंट

शिमला

गिरिपार की सालवाला पंचायत के ननसेर में दशहरा मेला संपन्न हो गया. समापन अवसर पर बोलते हुए विधायक विधायक चौधरी किरनेश जंग ने कहा कि मेले हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की पहचान हैं. हमारी संस्कृति को बचाने और देवताओं के प्रति गहरी आस्था और विश्वास के प्रतीक भी हैं.

उन्होंने कहा कि यह मेला रिसायत काल से मनाया जा रहा है. इसके लिए इसका धार्मिक महत्व भी किसी मेले के कम नहीं है. इस मेले में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ मनोरंजन भी है. उन्होंने कुश्ती के विजेताओं का पुरस्कार भी बांटे.

इस मौके पर नाग देवता सेवा समिति के अध्यक्ष दीपेंद्र भंडारी ने कहा कि यह मेला रियासतकाल से मनाया जाता है. श्रद्धालु देवता के दर्शन करके किसान फसल का फसलाना अनाज देवता को चढ़ाते आते हैं. इसमें मक्की और गेहं शामिल होते हैं.

इस दौरान श्रद्धालु नाग देवता की पूजा-अर्चना करते हैं. सुख-शांति का आशीर्वाद लेते हैं. मेले में लोग खरीदारी करते है. मेले के अंतिम दिन कुश्ती का आनंद उठाते हैं. इस बार कुश्ती प्रतियोगिता उत्तर प्रदेश के अशोक ने जीती. इस मेले में उतर प्रदेश, हरियाणा व हिमाचल के अलावा गिरिपार के शिलाई क्षेत्र और उत्तराखंड, हरियाणा से भी श्रद्धालु यहां पहुंचे.

इस मौके पर पांवटा कांग्रेस मंडल के पूर्व अध्यक्ष अवतार सिंह तारी, उपाध्यक्ष ओम प्रकाश कटारिया, बनौर पंचायत के प्रधान सुनील चौहान, पूर्व जिला परिषद सदस्य बलवीर चौहान, पूर्व प्रधान घासीराम आदि कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.

सालवाला के नाग देवता मेले के दौरान नवयुवक मंडल सालवाला की ओर से रामलीला का आयोजन भी किया जाता है. इस रामलीला का समापन मजदूर नेता प्रदीप चौहान ने किया. इस मौके पर उन्होंने क्लब के लिए 11 हजार की राशि देने की घोषणा की. इस अवसर पर प्रदीप चौहान ने कहा कि क्लब की ओर से दशहरे मेले के दौरान जो रामलीला का आयोजन किया जाता है.

इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं। क्योंकि आज के युग के रामलीलाओं की ओर युवा कम रुचि ले रहे हैं. मगर यहां के क्लब से यह जारी रखा है. इस मौके पर युवक मंडल के प्रधान जोगेंद सिंह, सुजाता शर्मा, सुखा देवी, विनोद कुमार और सुरेंद्र सिंह आदि उपस्थित थे.

Share With:
Rate This Article