शिक्षक बनना चाहते थे कलाम पर बन गए वैज्ञानिक, कुछ ऐसी थी भारत रत्न कलाम की जिंदगी

शिक्षक बनना चाहते थे कलाम पर बन गए वैज्ञानिक, कुछ ऐसी थी भारत रत्न कलाम की जिंदगी

दिल्ली

भारत के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न स्व. डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का आज जन्मदिन है. इस मौके पर पूरा देश आज कलाम को याद कर रहा है. सोशल मीडिया पर सुबह से ही टॉप ट्रेंड्स में बना हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित की है.

15 अक्तूबर, 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक मछुआरे के घर में जन्मे कलाम की मृत्यु 27 जुलाई, 2015 को शिलांग में हुई थी. कलाम की पूरी जिंदगी शिक्षा को समर्पित रही. साहित्य में रुचि रखने वाले कलाम को कविताएं लिखने और वीणा बजाने का भी शौक था.

मिसाइल मैन के नाम से मशूहर और भारत के पूर्व राष्ट्रपति कलाम को न केवल विज्ञान के क्षेत्र में महारत हासिल थी बल्कि वो एक अभियंता के रूप में विख्यात रहे. राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक रहा.

कलाम भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर राष्ट्र बनना देखना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने अपने जीवन में कई उपलब्धियों को भारत के नाम भी किया.

अपनी आरंभिक पढ़ाई पूरी करने के लिए कलाम को घर-घर अखबार बांटने का भी काम करना पड़ा था. कलाम ने अपने पिता से ईमानदारी व आत्मानुशासन की विरासत पाई थी और माता से ईश्वर-विश्वास तथा करुणा का उपहार लिया था.

किसी ने कलाम से उनकी मनपसंद भूमिका के बारे में सवाल किया था तो उनका कहना था कि शिक्षक की भूमिका उन्हें बेहद पसंद आती है. कलाम कहते थे, ‘इससे पहले कि सपने सच हों आपको सपने देखने होंगे.’ इसके साथ ही उनका यह भी कहना था, ‘सपने वह नहीं जो आप नींद में देखते हैं, यह तो एक ऐसी चीज है जो आपको नींद ही नहीं आने देती.’

लगभग 40 विश्वविद्यालयों द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि, पद्मभूषण और पद्मविभूषण व भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारतरत्न’ से सम्मानित होने वाले डॉ. कलाम बाल एवं युवा पीढ़ी के प्रेरणास्रोत थे. डॉ. कलाम की पूरी जिंदगी शिक्षा को समर्पित थी.

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