महंगी होगी MBBS की पढ़ाई, 67 हजार ज्यादा लगेगी फीस

महंगी होगी MBBS की पढ़ाई, 67 हजार ज्यादा लगेगी फीस

शिमला

प्रदेश में MBBS की पढ़ाई भी महंगी होगी. सरकार ने फीस बढ़ाने का मन बना लिया है. नई फीस दर 70 से 80 हजार रुपये सालाना हो सकती है. इसके लिए मुख्य सचिव वीसी फारका की अध्यक्षता वाली फीस निर्धारण कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर ली है.

MBBS की नई फीस दरें सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में भी लागू होंगी. अभी इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शिमला व डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कांगड़ा स्थित टांडा में MBBS प्रशिक्षुओं से सालाना 50 हजार रुपये फीस वसूली जा रही है. अधिकारिक तौर पर फीस दरें 37 हजार रुपये निर्धारित हैं.

वहीं, अब अगर फारका कमेटी की सिफारिशें लागू होती हैं तो कर्ज लेकर MBBS करने वाले गरीब बच्चों के लिए डॉक्टर बनने की राह कठिन हो जाएगी. फीस के अतिरिक्त MBBS प्रशिक्षु पर हर साल डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है.

फारका कमेटी की रिपोर्ट कहती है कि MBBS की फीस 70 से 80 हजार रुपये के बीच होनी चाहिए. फीस को इतना बढ़ाने के पीछे तर्क दिया गया है कि प्रति छात्र एक साल में सभी तरह के खर्च जोड़ दिए जाएं तो 3 लाख रुपये खर्च पड़ता है.

इसमें मेडिकल की पढ़ाई करवाने वाले शिक्षकों का वेतन, लैब व दूसरे ऐसे खर्च हैं जो नजर नहीं आते हैं. प्रस्तावित नई फीस दरें सरकारी क्षेत्र के वर्तमान दोनों मेडिकेल कॉलेजों के अतिरिक्त नए खुलने वाले निजी क्षेत्र के तीनों मेडिकल कॉलेजों पर भी लागू होंगी.

सरकारी क्षेत्र में चल रहे दोनों मेडिकल कॉलेजों आइजीएमसी व टांडा में प्रत्येक MBBS डॉक्टर से 17 हजार रुपये अधिक फीस वसूली जा रही है. प्रत्येक MBBS प्रशिक्षु से सालाना 50 हजार लिए जा रहे हैं, जबकि हर साल 37 हजार रुपये फीस लेने का प्रावधान है.

फीस की मौजूदा दरों का आकलन करने के लिए सरकार ने एक कमेटी गठित की थी. मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सरकारी क्षेत्र में चल रहे मेडिकल कॉलेजों की फीस दरों को बढ़ाने का ड्राफ्ट तैयार किया है. सुझाई गई फीस दरों में हर पहलू को ध्यान में रखा गया है. जो सिफारिशें कमेटी ने दी हैं उसके मुताबिक MBBS में सालाना फीस 70 से 80 हजार के बीच में होगी.

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