बोल्ड किरदार की जगह रामलीला की सीता को पसंद हैं साफ-सुथरे रोल

बोल्ड किरदार की जगह रामलीला की सीता को पसंद हैं साफ-सुथरे रोल

दिल्ली

रामायण की कथाएं और भगवान राम और माता सीता का चरित्र अपने आप में इतना महान है कि उनको निभाने के लिए सिर्फ अदाकारी आनी जरूरी नहीं. कलाकार को खुद अपने अंदर राम के आदर्श ओर सीता के त्याग को महसूस करना होता है.

रामलीला के मंच के सामने मौजूद हजारों की भीड़ इन कलाकारों के अंदर राम और सीता के आदर्श ही तलाश करती है, ऐसे में हर वक्त इन पात्रों को निभाने वाले कलाकारों को मर्यादा का ख्याल रखना पड़ता है.

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रामलीला के मंच पर जब हजारों की भीड़ के सामने लाइव संवाद बोलने हों, तो मेहनत भी वैसी ही करनी पड़ती है. रात में होने वाली लाइव रामलीला से पहले शाम को सीन की रिहर्सल भी की जाती है.

वहीं, दिल्ली लवकुश रामलीला कमेटी में सीता का किरदार निभा रहीं एक्ट्रेस गुरलीन चोपड़ा ने बताया कि सीता के किरदार को निभाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इस किरदार को निभाने के लिए उन्होंने काफी मेहनत भी की है.

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सीता हरण वाले दिन डायरेक्टर परवेश कुमार और लक्ष्मण का किरदार निभा रहे बॉलीवुड अभिनेता हरीश के साथ मंच पर प्रैक्टिस करने के बाद गुरलीन चोपड़ा ने एमएचवन न्यूज से खास बातचीत में बताया कि वो पहली बार रामलीला में किरदार निभा रही हैं.

उन्होंने बताया, व्यस्त लाइफ होने की वजह से काफी मन होने के बावजूद कभी थियेटर करने का मौका नहीं मिला, ऐसे में हजारों दर्शकों के सामने संवाद बोलने से पहले काफी तैयारी भी करनी पड़ती है. लोग माता सीता का चरित्र निभाने वाले कलाकार में सीता मां को ही देखते हैं ऐसे में पहनावे से लेकर मेकअप तक हर चीज का ख्याल रखना पड़ता है.

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गुरलीन ने कहा, माता सीता की कृपा से सब काम आसानी से हो रहा है. सीता के चरित्र को निभाने के दौरान कुछ ऐसे अनुभव भी होते हैं जो भुलाए नहीं जा सकते, लेकिन ये अनुभव कलाकारों को सीता माता की महानता और लोगों के दिलों में उनके लिए श्रद्धा को दिखाती हैं.

गुरलीन बताती हैं रामलीला खत्म होने के बाद आरती के दौरान बुजुर्ग जब उनका पैर छूते हैं तो उनको आशीर्वाद की मुद्रा में खड़ा रहना पड़ता है, कई बार ये थोड़ा अजीब भी लगता है, लेकिन वो सोचती हैं ये बुजुर्ग उनके अंदर गुरलीन चोपड़ा को नहीं मां सीता को देख रहे होते हैं, ये सारे अनुभव मेरे लिए भी बेहद खास हैं.

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गुरलीन का कहना है कि, फिल्मों की तरह रामलीला में भी कलाकारों को लंबे लंबे डायलॉग्स याद करने पड़ते हैं, लेकिन रामलीला के लाइव मंच पर रीटेक नहीं होते ऐसे में अभ्यास बहुत जरूरी होता है.

गुरलीन इसे अच्छा मानती हैं कि उनको सेक्सी भूमिकाओं की जगह साफ सुथरे रोल मिलेंगे, आज के दौर में मेकअप के जरिए वैसे भी कलाकारों का पूरा व्यक्तित्व ही बदल जाता है, इसके बावजूद अगर उनकी किस्मत में ये ही लिखा है तो वो सीता के चरित्र को निभाने के बाद इस जोखिम के लिए भी तैयार हैं.

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