शुंगलू कमेटी जल्द पेश करेगी रिपोर्ट, एलजी और सरकार के बीच फिर हो सकता है विवाद

शुंगलू कमेटी जल्द पेश करेगी रिपोर्ट, एलजी और सरकार के बीच फिर हो सकता है विवाद

दिल्ली

उपराज्यपाल नजीब जंग की तरफ से अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी सरकार ने 14 फरवरी, 2015 से 4 अगस्त, 2016 के बीच के फैसलों की जांच करने के लिए गठित शुंगलू कमेटी को 6 हफ्ते पूरे हो गए हैं.

राजनिवास ने अधिकारियों को बिना उपराज्यपाल अनुमति वाले फैसलों की फाइल 10 अक्तूबर तक भेजने का अंतिम अवसर दिया था. अगर अब भी कुछ फाइलें रह गई हैं तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी.

सूत्र बताते हैं कि समिति की जांच पड़ताल का काम अंतिम चरण में चल रहा है. करीब 500 फाइलों की पड़ताल करने में दिल्ली सरकार के कई दानिक्स अधिकारी और एक्सपर्ट की टीम लगी हुई है.

समिति को रिपोर्ट सौंपने के लिए 6 हफ्ते का समय दिया गया था, जो सोमवार को पूरा हो गया है. माना जा रहा है कि ये पूरा हफ्ता करीब-करीब छुट्टी में चला गया है, ऐसे में रिपोर्ट देने की तारीख थोड़ी बढ़ाई भी जा सकती है.

गौरतलब है कि उपराज्यपाल की तरफ से गठित समिति की अगुवाई पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक वीके शुंगलू कर रहे हैं, जिसमें पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपाल स्वामी और पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त प्रदीप कुमार शामिल हैं.

समिति को सभी तरह के उल्लंघन को लेकर दिल्ली सरकार के अधिकारी, सार्वजनिक पदाधिकारियों की भूमिका की जांच करके उत्तरदायित्व तय करने का जिम्मा दिया गया है.

अधिकारी या सार्वजनिक पदाधिकारी की तरफ से लिए गए निर्णयों से सरकार को अगर आर्थिक नुकसान हुआ है तो संबंधित के खिलाफ प्रशासनिक, आपराधिक या सिविल कार्रवाई की सिफारिश भी समिति करेगी.

बता दें कि उपराज्यपाल की तरफ से इस दौरान कई फैसले पलटे भी जा चुके हैं. बाकी फाइनल रिपोर्ट सामने आने के बाद उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच फिर से विवाद गहराने की संभावना है.

वहीं अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली कैबिनेट पहले ही इस समिति को अवैध करार दे चुकी है. हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट से उपराज्यपाल को मिले अधिकार को आधार मानकर अधिकारी कैबिनेट के फैसले से ज्यादा इत्तेफाक नहीं रखते.

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