मोदी सरकार का बड़ा फैसला, सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत नहीं किए जाएंगे

मोदी सरकार का बड़ा फैसला, ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के सबूत नहीं करेगी सार्वजनिक

दिल्ली

केंद्र की मोदी सरकार ने PoK में भारतीय सेना द्वारा अंजाम दिए गए सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़े किसी भी सबूत को जारी ना करने का फैसला किया है. सरकार का मानना है कि सबूत सामने आने से पाकिस्तानी सेना की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. लेकिन सरकार ऐसा नहीं करना चाहती.

अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, कुछ सरकारी सूत्रों ने कहा है कि ‘इस वक्त भारत युद्ध करने के समर्थन में नहीं है. लेकिन अगर फिर भी युद्ध के हालात बनते हैं तो भारत लड़ने और जीतने के लिए तैयार है.’

सरकारी सूत्र ने यह भी कहा कि भारत को सर्जिकल स्ट्राइक पर कूटनीतिक समर्थन भी मिला क्योंकि किसी भी देश ने हिंदुस्तान के इस कदम का विरोध नहीं किया. पाकिस्तान के सबसे करीबी माने जाने वाले चीन ने भी इस मामले पर कोई विरोध दर्ज नहीं किया. इतना ही नहीं बहुत से इस्लामिक देशों की तरफ से आने वाले बयान भी भारत के समर्थन में थे.

सूत्र ने यह भी बताया कि 2017 की गणतंत्र दिवस समारोह में अबुधाबी के प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहान को बुलाना भी कूटनीति का ही हिस्सा है.

सर्जिकल स्ट्राइक पर जमकर बयानबाजी और राजनीति हुई. यहां तक कांग्रेस के नेता संजय निरुपम ने इसे फर्जी बताया तो केजरीवाल ने इसके सबूत मांग लिए. इस तरह की बातों पर सरकार ने अभी तक फैसला नहीं लिया है कि वो इस ऑपरेशन का वीडियो जारी करें या नहीं.

सरकार के अनुसार, डीजीएमओ के बयान पर भरोसा किया जाना चाहिए. सूत्रों से पता चला है कि सरकार इस ऑपरेशन पर हो रही राजनीति में नहीं पड़ना चाहती. सरकार का मानना है कि इस मसले पर हो रही राजनीति के कारण उसको लाइन ऑफ कंट्रोल के पार सेना के ऑपरेशन के किसी को कोई सुबूत देने की जरूरत नहीं है.

सर्जिकल स्ट्राइक की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के साथ बैठक की. सूत्रों के मुताबिक, पाक अधिकृत कश्मीर भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत पहले से रक्षा मंत्रालय के पास हैं. बुधवार की मीटिंग में इस बात पर चर्चा हुई कि इन सबूतों को सार्वजनिक किया जाए या नहीं.

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