दशहरा मेले को लेकर पिता के ही गुरू से भिड़ गईं पंकजा मुंडे

दशहरा मेले को लेकर पिता के ही गुरू से भिड़ गईं पंकजा मुंडे

मुंबई

दिवंगत बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी और मंत्री पंकजा मुंडे अपने पिता के ही गुरू महंत नामदेव शास्त्री से भिड़ गई हैं. यह लड़ाई अहमदनगर के एक बड़े तीर्थस्थल भगवान गढ़ पर दशहरा मेले को लेकर है. शास्त्री इस तीर्थस्थल के महंत हैं और कई सालों से यहां बड़े दशहरा मेले की परंपरा है. शास्त्री ने साफ कह दिया है कि पंकजा को इस मेले में रैली और भाषण नहीं करने दिया जाएगा. बदले में पंकजा ने भी खुलासा कह दिया है कि उन्होंने महंत को पहले कितनी आर्थिक मदद की है?

दरअसल, भगवानगढ़ का मेला मुंडे की जाति वंजारा समुदाय का सबसे बड़ा मेला होता है, जहां लाखों वंजारी जुटते हैं. यही वंजारी वोट बैक सबसे बड़ी वजह है. पंकजा को लगता है कि वह इस जाति की सबसे बड़ी नेता हैं तो महंत को लगता है कि लोग उनके कहने पर वोट देते हैं। पहले महंत नामदेव शास्त्री दिवगंत नेता गोपीनाथ मुंडे के बहुत करीबी थे.

गोपीनाथ ने ही नामदेव शास्त्री को मदद करके उनको इतना बड़ा बना दिया, लेकिन गोपीनाथ मुंडे के निधन के बाद उनके ही भतीजे धनंजय मुंडे ने बगावत कर दी और एनसीपी चले गए. महंत नामदेव को भी धनंजय मुंडे ने मिला लिया इसलिए धनंजय और महंत मिलकर अब पंकजा मुंडे को चुनौती दे रहे है.

इस बीच महंत ने एक ऑडियो क्लिप भी जारी की है, जिसमें पंकजा मुडे फोन पर ही महंत को याद दिला रही हैं कि कितनी अब तक मदद की है और अब आगे मदद नहीं मिलेगी. मुझसे संबंध बिगाड़ना भारी पड़ेगा. उधर, धनंजय मुंडे दावा कर रहे हैं कि वह कितना विकास कर रहे हैं.

अब घर की इस लडाई में महंत के कूदने से मामला दिलचस्प हो गया है. पंकजा कह रही हैं कि वह तो मेले में जाएगीं. यह उनका हक है. वहीं, महंत कह रहे हैं कि अब तक उन्होंने पंकजा को बेटी की तरह माना है, लेकिन जिस तरह से वह धमका रही हैं. उससे उनको सदमा लगा है. वह सत्ता का दुरुपयोग ना करें. अब दशहरा मेले के दिन महंत और पंकजा मुंडे के समर्थकों में भिडंत होने की भी आशंका है.

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