मैथ्यू तूफान का कहर, हैती में 800 से ज्यादा मौतें, अमेरिका में भी भारी तबाही

मैथ्यू तूफान का तांडव, हैती में 800 से ज्यादा मौतें, अमेरिका में भी भारी तबाही

वाशिंगटन

अमेरिकी महाद्वीप में मैथ्यू तूफान ने भारी तबाही मचाई है. हैती में इस तूफान में मरने वालों की संख्या 800 से ऊपर पहुंच चुकी है तो वहीं अमेरिका के कई हिस्सों में भारी तबाही हुई है. लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है तो कई राज्यों में बुनियादी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है.

चक्रवाती तूफान मैथ्यू से हैती में अबतक 842 लोगों की मौत हो चुकी है. हैती के बाद चक्रवात अमेरिका पहुंच चुका है. तूफान के कारण बुनियादी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है. अमेरिका में करीब 12 लाख लोग बिना बिजली सप्लाई वाले इलाकों में फंसे हुए हैं. अमेरिका में 3,800 से ज्यादा उड़ानों को रद्द करना पड़ा है.

अमेरिका के फ्लोरिडा प्रांत के पॉम बीच और केप केनवेरेल के बीच विनाशकारी तूफान के टकराने की आशंका से ऐहतियात बरतते हुए तटीय इलाके पहले ही खाली करा लिए गए थे. तूफान के कारण फ्लोरिडा में 195 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं और भारी बारिश हो रही है.

जार्जिया और साउथ कैरोलिना प्रांत में भी तूफानी हवाएं चल रही हैं. इसकी वजह से फोर्ट लाउडर्डेल हॉलीवुड एयरपोर्ट को 2005 के बाद पहली बार बंद किया गया है. फ्लोरिडा में आपात स्थिति घोषित कर दी गई है. करीब 20 लाख लोगों को तटीय इलाकों से हटने का आदेश दे दिया गया है.

हैती से पहले तूफान ने जमैका, क्यूबा, बहामा और डोमिनिक रिपब्लिकन में भी तबाही मचाई थी. लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान हैती में हुआ है, जहां हजारों लोग बेघर हो गए और फसलें बरबाद हो गईं. हैती में अधिकारियों ने कहा है कि तूफ़ान मैथ्यू के कारण मरने वालों की संख्या आठ सौ के करीब पहुंच गई है.

मंगलवार को हैती का दक्षिणी-पश्चिमी इलाका तूफ़ान की चपेट में आ गया था. तूफ़ान से जेरेमी शहर सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है. यह शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो चुका है और हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं.

हैती के दक्षिणी सूबे सूद में 30,000 घर तहस-नहस हो गए हैं. ‘मैथ्यू’ ने हैती में इस क़दर नुकसान किया है कि वहां राष्ट्रपति चुनाव तक स्थगित करने पड़े हैं. तूफ़ान से प्रभावित शहरों से संपर्क टूट गया है और सिर्फ समुद्र या फिर हेलिकॉप्टरों के ज़रिए इन जगहों पर पहुंचा जा सकता है. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि जब तक राहत टीमें दूरदराज़ के इलाकों में पहुंचेंगी मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है.

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