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एलओसी के ग्रामीण बोले- फौज हमारी चिंता न करे पर पाकिस्तान के होश जरूर ठिकाने लगाए

यह हैरत भरा सच है कि केंद्रीय गृहमंत्रालय की एडवाइजरी और प्रशासन की हिदायतों के बाद भी इस बार सरहद और नियंत्रण रेखा पर बसा कोई भी गांव खाली नहीं हुआ है। एहतियातन जिन परिवारों की महिलाओं और बच्चों ने वीरवार की रात कैंपों या रिश्तेदारों के घर बिताई भी वे शुक्रवार को पौ फटते ही अपने-अपने घरों में पहुंच गए।

हालांकि कुछ लोगों ने अपने परिवार सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाए भी हैं। ऐसे 50 से भी अधिक गांवों में पहुंचीें अमर उजाला की टीमों से इन गांवों के वाशिंदों का कहना था कि अब कुछ भी हो जाए, हम अपनी दहलीज नहीं छोड़ेंगे।

शुक्रवार को श्राद्घ का आखिरी दिन था। शनिवार से नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। ज्यादातर लोग घरों में माता को विराजमान करते हैं। फिर करवा चौथ है, दशहरा है और दीपावली भी। त्योहारों के इस सीजन में कोई भी अपना घर सूना छोड़ने को राजी नहीं। वे आशंकित तो हैं लेकिन आतंकी कैंपों की तबाही से आश्वस्त भी हैं।

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